Tuesday, May 19, 2026
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देश को CORONA से बचाने के लिए COVID-19 वैक्सीन गुणवत्ता परीक्षण में हुई फैल

तेजस्विनी पटेल, संवाददाता

नई दिल्ली। दुनिया भर में कोरोना टीकाकरण अभियान के बीच टीके के बारे में एक बुरी खबर भी आ रही है। दरअसल, जॉनसन एंड जॉनसन की COVID-19 वैक्सीन गुणवत्ता परीक्षण में विफल रही है। इस बात की पुष्टि खुद कंपनी ने की है।

रिपोर्टों के अनुसार, जॉनसन एंड जॉनसन ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन की एक खेप गुणवत्ता की जांच में विफल रही है और यह प्रयोग करने योग्य नहीं है। इसके अलावा अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इससे भविष्य में वैक्सीन की आपूर्ति कितनी प्रभावित होगी। माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की खुराक बर्बाद हुई है। हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि वो इस साल के अंत तक तक वैक्सीन के निर्माण के अपने अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लेगी। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘हम 2021 के अंत तक एक अरब से अधिक खुराक बनाने के अपने लक्ष्य को पूरा कर लेंगे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड-19 वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी। यह वैक्सीन ‘वन शॉट डोज’ पर आधारित है, यानी कोरोना से बचाव के लिए आपको इस वैक्सीन की सिर्फ एक ही खुराक लेनी होती है। क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया है कि जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन 67 फीसदी प्रभावी है। वहीं गंभीर बीमारी को रोकने में यह कोरोना वैक्सीन 85.4 फीसदी कारगर साबित हुई है। क्लिनिकल ट्रायल के डेटा के मुताबिक, यह बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों पर अधिक प्रभावी है। 

जंतर-मंतर पर BJP का मौन उपवास, AAP पर लगाए आरोप

जूही तोमर, संवाददाता

नई दिल्ली। भाजपा ने मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बताया झूठों का सरताज, आपको बता दें की जंतर-मंतर पर हुए भाजपा के मौन उपवास में अरुण सिंह के अलावा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद मीनाक्षी लेखी और राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आरपी सिंह सहित कई नेता मौजूद थे। इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार की नई शराब नीति भ्रष्टाचार पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि इस जनविरोध नीति और सरकार के खिलाफ भाजपा का आंदोलन तब तक चलेगा जब तक AAP सरकार को सत्ता से बाहर न कर दें। हम केजरीवाल की नींद हराम कर देंगे। वही आपको बता दे की जंतर-मंतर पर संबोधन के दौरान आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल खुद की कमाई बढ़ाने के लिए नई आबकारी नीति लाये हैं, जिसमें हर वार्ड में तीन शराब की दुकानें होंगी। अभी तक 88 ऐसे वार्ड हैं जहां शराब की कोई दुकान नहीं, लेकिन अब वहां भी शराब बेची जाएगी। इसके अलावा केजरीवाल सरकार हर एक वार्ड में तीन-तीन शराब की दुकानों के हिसाब से कुल दुकानों की संख्या 850 करने जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार अब शराब कैसे पी जाए यह भी सिखाएगी. इस काम के लिए पांच स्कूल खोलने का प्रस्ताव है. शायद यह केजरीवाल सरकार की ‘हैपीनेस नीति’ का अंग है। 21 साल की आयु वाला भी शराब खरीद सकेगा और दुकाने भी आधी रात के बाद तक खुली रहेगी।

अभी तक शराब खरीदने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष थी। आदेश गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार शराब वितरण में असामनता खत्म करने के लिए दुकानों की संख्या बढ़ाने जा रही है. लेकिन उन्होंने कभी भी पानी और शिक्षा की समान वितरण की बात नहीं कही. आज शराब बेचकर केजरीवाल सरकार के बहाने अपनी पार्टी की जेब भरने के काम में जुटे हुए हैं। इन पैसों से वे दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

तुलसी संस्था ने किया स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन

नेहा राठौर

तुलसी संस्था ने निशुलक स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया है। उत्तरी पश्चिमी दिल्ली के भलस्वा वार्ड के अंतर्गत मेट्रो अपार्टमेंट में तुलसी संसाथा का सौजन्य से निशुल्क कैंसर जांच शिविर का आयोजन के बारे में बताया गया है। इस आयोजन को राजीव गांधी कैंसर हॉस्पिटल के सहयोग से लगाया गया था।

इस जांच शिविर के संचालन कैंसर प्रिवेंटिव विभागाध्यक्ष और स्त्री रोग विशेषत्र डॉ. इंदू अग्रवाल के नेत्ततृव में किया गया। इस आयोजन में डॉक्टरों ने करीब 200 महिलाओं की जांच की। इसके अलावा आयोजन में ई.इन.टी विशेषज्ञ डॉ. श्रेया ने महिलाओं और पुरुषों के गले का निरीक्षण किया। ब्लड प्रेशर और शुगर टेस्ट के लिए भी राजीव गांधी अस्पताल के प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा उपलब्ध करवाया गया।

बता दें कि इस शिविर का उद्घाटन स्थानीय निगम पार्षद श्री सुरिंदर खरब जी ने किया इसके अलावा उन्होंने पूरा समय वहां रहकर शिविर की गतिविधियों की देखरेख भी की। इस शिविर के आयोजन में स्थानीय निवासी श्रीमती सुमु और श्रीमती रश्मि ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस कार्यक्रम में महासचिव कंचन गुप्ता ने बताया कि कैंसर जांच का शिविर सिर्फ महिलाओं के लिए लगाया गया था क्योंकि महिलाएं परिवार और घरेलू कामकाज को प्राथमिकता देती है और अपने स्वास्थ्य के लिए उदासीन रवैया अपनाती है। इसी लिए महिलाओं के चेस्ट और यूटर्स का कैंसर बहुत जल्दी से फैलता है और एक महामारी का रुप ले लेता है। उन्होंने बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं कैंसर का शिकार ज्यादा होती हैं। इसलिए इस शिविर का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं में उनके स्वास्थ्य के लिए जागरूकता को संचालित करना है।

आखिर में इस पर संस्था के अध्यक्ष महाराज चरविंदा दास जी ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि राजीव गांधी अस्पताल के सहयोग से तुलसी संस्था जल्द ही इसी तरह के शिविर दोबार अन्य स्थानों पर लगाया जाएगा, जिसमें दिल्ली पुलिस के महिला अधिकारियों का निरक्षण विशेष रूप से किया जाएगा। क्योंकि महिला अधिकारी की व्यस्तता अन्य महिलाओं से ज्यादा देखी जा रही है। इसी के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ और अध्यक्ष जी ने सभी डॉक्टर और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। 

अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है

अविशा मिश्रा, संवाददाता

नई दिल्ली।। अगर आप भी नौकरी करते हैं तो ये खबर आपके लिए है। आपको बता दें कि नए वित्‍त वर्ष यानी 1 अप्रैल 2021 से आपकी सैलरी में बड़े बदलाव हो सकते हैं।

केंद्र सरकार की ओर से इन बदलावों के लिए लाए गए विधेयक के नियमों पर अभी भी चर्चा चल रही है। इसे लागू करने को लेकर अभी विचार-विमर्श किया जा रहा है। बता दें कि पिछले साल संसद में पास किए गए तीन मजदूरी संहिता विधेयक की वजह से ये बदलाव हो सकते हैं। सरकार के प्लान के मुताबिक, 1 अप्रैल से मूल वेतन, कुल सैलरी का 50 फीसदी या अधिक होना चाहिए। केंद्र सरकार का दावा है कि वेतन में किए जाने वाले इस बदलाव से नियोक्ता और श्रमिक दोनों को फायदा मिलेगा। नए नियमों के मुताबिक, आपके पीएफ में एक ओर जहां इजाफा होगा। वहीं, आपकी इनहैंड सैलरी कम हो जाएगी। दरअसल नए नियमों के मुताबिक, मूल वेतन कुल वेतन का 50 फीसदी या अधिक होना चाहिए। ज्यादातर नौकरी पेशा लोगों का सैलरी स्ट्रक्चर इस बदलाव के बाद पूरी तरह बदल सकता है. बता दें मूल वेतन बढ़ने से पीएफ में भी इजाफा होगा, क्योंकि ये बेसिक सैलरी पर आधारित होता है। काम करने के अधिकतम घंटों को बढ़ाकर 12 करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा 15 से 30 मिनट तक एक्सट्रा काम करने को भी ओवरटाइम में शामिल किया जाने का प्रावधान है।

मौजूदा समय में अगर आप 30 मिनट से कम समय के लिए एक्सट्रा काम करते हैं तो उसको ओवरटाइम में नहीं गिना जाता है। नए नियमों के मुताबिक, 5 घंटे से ज्यादा लगातार काम करने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों को 5 घंटे काम करने के बाद आधे घंटे का ब्रेक दिया जाना चाहिए। पीएफ राशि बढ़ने से रिटायरमेंट की राशि में भी इजाफा होगा. रिटायरमेंट के बाद लोगों को इस राशि से काफी मदद मिलेगी। पीएफ और ग्रैच्युटी बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी वृद्धि होगी क्योंकि उन्हें भी कर्मचारियों के लिए पीएफ में ज्यादा योगदान देना पड़ेगा। पिछले साल संसद में पास किए गए तीन मजदूरी संहिता विधेयक की वजह से ये बदलाव हो सकते हैं।

रक्त के थक्के बनना कितना होता है खतरनाक

तेजस्विनी पटेल, संवाददाता

नई दिल्ली।। रक्त के थक्के को कभी-कभी अच्छा माना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर आपको कहीं चोट लगी है, तो थक्के शरीर से अधिक रक्तस्राव को रोकते हैं। हालांकि रक्त के थक्के कभी-कभी खतरनाक होते हैं। जब शरीर के अंदर नसों में थक्का जमने लगता है, तो यह खतरनाक हो जाता है। दरअसल, थक्के रक्त के प्रवाह को रोकते हैं, जिसके कारण मृत्यु का खतरा होता है। आइए जानते हैं रक्त के थक्के बनने के उन लक्षणों के बारे में, जिन्हें सेहत की अनदेखी कर सकते हैं।

हाथ या पैरों में सूजन 

यदि आपके हाथ या पैर सूज गए हैं, तो इसे बिल्कुल भी अनदेखा न करें, क्योंकि यह रक्त के थक्के का लक्षण हो सकता है। स्वास्थ्य सूचना वेबसाइट वेबएमडी के अनुसार, यदि आपको लगातार दर्द के साथ-साथ सूजन की समस्या है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

त्वचा का लाल होना 

अगर हाथ या पैर में खिंचाव या दर्द के साथ सूजन है और त्वचा गहरे लाल या नीले रंग में बदल जाती है, तो यह रक्त के थक्के का संकेत हो सकता है। यदि आप समस्या को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं, तो यह भविष्य में खतरनाक हो सकता है।

सीने में दर्द 

हर बार सीने में दर्द दिल के दौरे का संकेत नहीं है, यह फुफ्फुसीय अन्त: शल्यता का लक्षण भी हो सकता है। इसमें रक्त के थक्के फेफड़ों में जमा हो जाते हैं। दरअसल, इसमें बहुत तेज दर्द होता है और सांस लेने पर यह खराब हो जाता है। इस मामले में आपको तुरंत एक डॉक्टर को देखना चाहिए।

सांस लेने में तकलीफ 

यह एक गंभीर लक्षण है। दरअसल, जब फेफड़ों में रक्त के थक्के बनते हैं, तो ऑक्सीजन का प्रवाह धीमा हो जाता है और इसके कारण सांस लेने में परेशानी होती है। अगर आपको ये लक्षण अचानक दिखते हैं तो आपको डॉक्टर को देखना चाहिए।