नई दिल्ली: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच खेलने के सरकारी फैसले ने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने इस फैसले को देश की शहादत का अपमान करार देते हुए तीखे सवाल उठाए हैं। भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए दावा किया कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव (विशेषकर अमेरिका के हस्तक्षेप) के आगे झुककर न केवल सैन्य अभियान को बीच में रोका, बल्कि अब उसी दुश्मन देश के साथ खेल का माहौल बनाकर शहीदों के बलिदान की अनदेखी कर रही है।
सौरभ भारद्वाज ने अपने ट्वीट में उस पुरानी याद का जिक्र किया, जब सरकार की ओर से पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने की बातें की गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब हमारे सशस्त्र बल PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) तक पहुँचने की स्थिति में थे और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए एक निर्णायक जीत की ओर बढ़ रहे थे, तब अचानक युद्धविराम (Ceasefire) का ऐलान कर दिया गया। भारद्वाज का कहना है कि विपक्ष और देश की जनता का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर इस अभियान को ‘पॉज’ (रोक) दिया, जिससे भारत के पास PoK को पुनः प्राप्त करने का एक ऐतिहासिक मौका हाथ से निकल गया।
आप नेता ने इसे दोहरा मापदंड करार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार ने कभी यह दावा किया था कि “उनकी रगों में गर्म सिंदूर दौड़ रहा है,” आज उसी सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेला जा रहा है। भारद्वाज ने इसे ‘शर्मनाक’ बताते हुए सवाल किया कि क्या क्रिकेट मैच में मिलने वाली व्यावसायिक कमाई और सट्टेबाजी का खेल, हमारे शहीदों के बलिदान से बड़ा हो गया है? उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से भी सवाल किया कि जो लोग पहले पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच का कड़ा विरोध करते थे, वे अब इस फैसले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सौरभ भारद्वाज का यह हमला सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह राष्ट्रवाद के मुद्दे को सीधे पाकिस्तान और क्रिकेट से जोड़ता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उपजी यह स्थिति अब देश में एक बड़ा विवाद बन चुकी है। आम आदमी पार्टी की मांग है कि सरकार स्पष्ट करे कि आखिर किस दबाव में आकर देश के सैन्य हितों को दरकिनार किया गया और PoK को मुक्त कराने का सपना अधूरा छोड़ दिया गया।

