जंतर-मंतर पर फिर जुटे सीजेपी प्रदर्शनकारी, संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा बल तैनात हैं और प्रदर्शनकारी दोबारा मंच तैयार कर धरने पर बैठ गए हैं।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर अपना मंच तैयार कर लिया है। बीते सोमवार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों के बाद, मंगलवार सुबह करीब 100 प्रदर्शनकारी धरनास्थल पर डटे हुए नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्सेस के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है।
इससे पहले सोमवार को सीजेपी ने संसद मार्च का ऐलान किया था, जिसके बाद जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चारों तरफ से घेर लिया था और उग्र हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए शाम करीब चार बजे धरनास्थल को खाली कराना शुरू कर दिया था। इस दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद सभी प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया गया था।
सोमवार को हुई झड़पों के बाद दिल्ली पुलिस ने कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के लिए कई उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों ने हिंसा की जांच और सुरक्षा उपायों पर चर्चा की। इससे पहले सोमवार सुबह भी रणनीतिक स्थानों पर जवानों की तैनाती को लेकर एक बैठक बुलाई गई थी।
पुलिस की कार्रवाई के बावजूद मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे से ही सीजेपी कार्यकर्ता और छात्र दोबारा जंतर-मंतर पर जुटने शुरू हो गए हैं। धरनास्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। वहां अभी भी छात्रों का आना लगातार जारी है।
इस पूरे प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता विजेता दाहिया को लेकर एक विवाद भी सामने आया है। सोमवार दोपहर करीब 2 बजे, जब प्रदर्शनकारी सड़कों पर थे, तब विजेता दाहिया को सुभाष पैलेस मेट्रो स्टेशन पर बर्गर खाते हुए देखा गया था। इस दौरान आयुष और ऋतिक नाम के दो युवकों ने उनसे सवाल किया कि वे प्रदर्शनकारियों को लाठी खाने के लिए छोड़कर खुद वहां क्यों नहीं गए।
इस विवाद पर सफाई देते हुए विजेता दाहिया ने कहा कि वह बहुत भूखे थे और कई रातों से सोए नहीं थे, इसलिए वह प्रदर्शन के समय वहां मौजूद नहीं रह सके। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन में शामिल लोगों को जमीनी हकीकत का पता है। हालांकि, जब दोनों युवकों ने उनसे तीखे सवाल पूछे, तो वह पहले चुप रहे और फिर उन्हें तमीज सिखाने लगे।
लेखक

टिप्पणियाँ
3संतुलित, अच्छी तरह प्रमाणित रिपोर्टिंग। इसीलिए मैं आज भी ख़बरों के लिए भुगतान करता हूँ।
इसे अपने परिवार के समूह में साझा किया। द्विभाषी टॉगल सचमुच उपयोगी है।
आगे क्या होगा वाला हिस्सा वही है जिसे सब छोड़ेंगे और सबको पढ़ना चाहिए।