दिल्ली पुलिस के एसीपी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार पर एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज
एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर पुलिस ने महिला पत्रकार और उनके सहयोगियों के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी और सरकारी काम में बाधा डालने की प्राथमिकी दर्ज की है।

दिल्ली पुलिस के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। एसीपी की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर पत्रकार और दो अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, एसीपी विवेक भगत ने आरोप लगाया है कि एक प्रदर्शन के दौरान जब वह ड्यूटी पर तैनात थे, तब पत्रकार और उनके सहयोगियों ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और जातिसूचक टिप्पणियां कीं। मंगलवार को दर्ज इस मामले में बीएनएस की धारा 221 (लोक सेवक के काम में बाधा डालना), धारा 356(2) (मानहानि) और धारा 3(5) (साझा दायित्व) के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कानून के प्रावधान जोड़े गए हैं।
यह घटनाक्रम 3 अक्टूबर का बताया जा रहा है, जब बूटा सिंह गोलचक्कर के पास बीएनएसएस की धारा 163 लागू थी और पुलिस प्रदर्शनकारियों को हटने के लिए कह रही थी। महिला पत्रकार ने लगभग 12 दिन पहले पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि जब वह एक वामपंथी कार्यकर्ता को हिरासत में लिए जाने का वीडियो बना रही थीं, तब एसीपी ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और धक्का दिया।
महिला पत्रकार की उस शिकायत पर अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है और मामले की निष्पक्ष जांच अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) को सौंपी गई है। इस बीच, लगभग दस दिन पहले पदोन्नत होने वाले ग्यारह अधिकारियों में एसीपी भगत का नाम भी शामिल था, लेकिन स्वयं उनके अनुरोध पर इस पदोन्नति को फिलहाल स्थगित रखा गया है।
अपनी शिकायत में एसीपी भगत ने पत्रकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोपहर करीब ढाई बजे उन्होंने और उनके स्टाफ ने पत्रकार को अपने सहयोगी गजेंद्र सिंह व अन्य लोगों के साथ अपनी जाति और नाम लेकर बात करते सुना था। अधिकारी ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी सार्वजनिक तौर पर उन्हें अपमानित करने के इरादे से की गई थी, जिसे उस समय उन्होंने नजरअंदाज कर ड्यूटी जारी रखी।
प्राथमिकी के मुताबिक, दोपहर लगभग तीन बजे जब एसीपी हिरासत में लिए गए लोगों की बस के लिए रास्ता साफ करवा रहे थे, तब पत्रकार और उनके साथियों ने उन पर छेड़छाड़ का आरोप लगाना शुरू कर दिया। अधिकारी ने कहा कि उन्हें कई बार घेरा गया और सार्वजनिक रूप से उन पर आरोप लगाए गए, जिसके चलते सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई।
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