दिल्ली के 42 कॉरिडोर पर एआई ट्रैफिक सिग्नलों से कितनी मिलेगी राहत? पुलिस अध्ययन में हुआ खुलासा
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के कंप्यूटर सिमुलेशन अध्ययन के अनुसार 42 प्रमुख मार्गों पर एआई-आधारित सिग्नल प्रणाली से जाम में अलग-अलग स्तर की राहत मिलेगी।

केंद्र सरकार द्वारा राजधानी में चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) को लेकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एक सिमुलेशन अध्ययन तैयार किया है। इस तकनीकी मूल्यांकन के अनुसार, शहर के 42 प्रमुख कॉरिडोर पर रियल-टाइम डायनेमिक सिग्नल व्यवस्था लागू होने से कई मार्गों पर जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी। हालांकि, अत्यधिक दबाव वाले प्रमुख आर्टेरियल मार्गों पर इसका असर बेहद सीमित रहने का अनुमान है।
अध्ययन के अनुसार, नेल्सन मंडेला मार्ग, डीएनडी फ्लाईवे-गाजीपुर रोड कॉरिडोर, मायापुरी रोड, पायल रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग 9 (एनएच-24) जैसे मार्गों पर वाहन चालकों को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है। इन रास्तों पर जाम के समय (डिले टाइम) में लगभग 40 प्रतिशत तक की गिरावट और कुल यात्रा समय में 25 प्रतिशत से अधिक की कमी आने का अनुमान जताया गया है। यहां डिले टाइम से आशय ट्रैफिक में फंसे रहने वाले समय से है, जबकि ट्रैवल टाइम पूरी यात्रा में लगने वाला समय है।
ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े कंप्यूटर मॉडलिंग पर आधारित अनुमान हैं और ये अब तक जमीन पर हासिल किए गए परिणाम नहीं हैं। इस अध्ययन के लिए एक विशेष टीम गठित की गई थी, जिसने स्थिर टाइमर के बजाय ट्रैफिक के वास्तविक दबाव के आधार पर सिग्नल बदलने के प्रभाव को आंका है। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक परिणाम प्रणाली के पूरी तरह जमीन पर लागू होने के बाद ही सामने आएंगे।
राजधानी की लाइफलाइन माने जाने वाले रिंग रोड और आउटर रिंग रोड पर इस तकनीक के अलग-अलग प्रभाव देखने को मिले हैं। अध्ययन के मुताबिक, 48.09 किलोमीटर लंबे रिंग रोड पर भारी वाहन दबाव और लेन की समस्याओं के कारण डिले और यात्रा समय में महज 10 प्रतिशत की राहत मिलने का अनुमान है। इसके विपरीत, 26.47 किलोमीटर लंबे आउटर रिंग रोड पर स्मार्ट सिग्नल सिंक्रोनाइजेशन बेहतर काम करेगा, जहां जाम में करीब 30 प्रतिशत और यात्रा समय में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी आ सकती है।
लोधी रोड (2.65 किमी), प्रेस एन्क्लेव रोड (3.32 किमी), लाला लाजपत राय मार्ग-लाल बहादुर शास्त्री मार्ग (9.22 किमी) और राव तुला राम रोड-शांतिपथ (11.99 किमी) जैसे अपेक्षाकृत छोटे और स्थानीय संपर्कों पर भी अच्छे परिणाम मिलने का अनुमान है। इन सभी स्ट्रेच पर ट्रैफिक में लगने वाले अतिरिक्त समय में 30 प्रतिशत और यात्रा समय में 20 प्रतिशत से अधिक की राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके विपरीत, अत्यधिक व्यस्त चौराहों और बहु-दिशात्मक ट्रैफिक वाले कई प्रमुख मार्गों पर यह नई प्रणाली कोई खास बदलाव नहीं ला सकेगी। उदाहरण के तौर पर, जीटी रोड, न्यू आईएसबीटी फ्लाईओवर, बुलेवार्ड रोड और जीटी करनाल रोड को जोड़ने वाले 21.07 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच पर डिले और यात्रा समय में महज 2 प्रतिशत की नगण्य राहत का अनुमान लगाया गया है।
इसी तरह, कालिदास मार्ग, मोती नगर फ्लाईओवर, नजफगढ़ रोड, बहादुरगढ़ रोड और श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग से जुड़े 23.79 किलोमीटर लंबे मार्ग पर जाम में सिर्फ 5 प्रतिशत कमी आने का आकलन है। इसके अलावा, महरौली-गुड़गांव रोड व श्री अरबिंदो मार्ग, मथुरा रोड-बीएसजेड मार्ग, और एनएच 48-सरदार पटेल मार्ग-कनॉट प्लेस कॉरिडोर जैसे अन्य व्यस्त मार्गों पर भी यात्रा समय और जाम में केवल 10 प्रतिशत के आसपास ही सुधार होने की संभावना जताई गई है।
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