दिल्ली में DTC बसों के संचालन की समीक्षा की मांग, फेडरेशन ऑफ अशोक विहार ने LG और मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
पत्र अशोक विहार फेडरेशन ने कहा—सड़कों पर बसों की संख्या बढ़ाने से पहले यात्रियों की मांग, रूट और ट्रैफिक की स्थिति का हो आकलन

राजेंद्र स्वामी ' दिल्ली दर्पण
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण के बीच DTC बसों के संचालन और रूट प्लानिंग को लेकर फेडरेशन ऑफ अशोक विहार (रजि.) ने सरकार से व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. एच. सी. गुप्ता ने दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर बसों की संख्या बढ़ाने के बजाय उनकी तैनाती, यात्रियों की संख्या और रूट की जरूरतों के आधार पर उचित योजना बनाने का आग्रह किया है। फेडरेशन का कहना है कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना जरूरी है, लेकिन यात्रियों की वास्तविक मांग और सड़कों की क्षमता का आकलन किए बिना बसों की संख्या बढ़ाना ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना सकता है। कम यात्रियों वाली बसों और एक साथ चलने वाली सेवाओं पर उठाए सवाल
पत्र में दावा किया गया है कि कई बार छह से आठ बसें एक के पीछे एक चलती दिखाई देती हैं और कुछ बसों में सीटों की क्षमता के मुकाबले यात्रियों की संख्या काफी कम होती है। फेडरेशन के अनुसार, ऐसी स्थिति में सड़कों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, यातायात की गति प्रभावित होती है और ईंधन की खपत तथा उत्सर्जन को कम करने की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। डॉ. गुप्ता ने पत्र में कहा है कि ट्रैफिक का सुचारु संचालन होने से वाहनों के बेवजह खड़े रहने का समय कम हो सकता है, जिससे ईंधन की बचत और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिल सकती है। ऐसे में बसों की तैनाती और उनकी आवृत्ति को यात्रियों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए। मेट्रो और ई-रिक्शा के साथ बेहतर तालमेल की मांग फेडरेशन ने पत्र में यह भी कहा है कि कई यात्री अपनी सुविधा और आर्थिक क्षमता के अनुसार मेट्रो तथा ई-रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए बस सेवाओं की योजना बनाते समय मेट्रो नेटवर्क और अंतिम दूरी तक परिवहन की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि एक ही मार्ग पर अनावश्यक रूप से सेवाओं की पुनरावृत्ति न हो। फेडरेशन ने सरकार के सामने रखे ये सुझाव फेडरेशन ऑफ अशोक विहार ने अपने पत्र में दिल्ली सरकार से छह प्रमुख कदम उठाने का आग्रह किया है: रूट के अनुसार यात्रियों की संख्या का सर्वे: कम उपयोग वाली बसों और एक-दूसरे से मिलते-जुलते रूट की पहचान की जाए। बसों की संख्या और आवृत्ति का युक्तिसंगत निर्धारण: यात्रियों की मांग, पीक आवर्स और सड़क की क्षमता के अनुसार बसें चलाई जाएं। उपयुक्त मार्गों पर छोटी बसों का इस्तेमाल: संकरी सड़कों और अधिक भीड़ वाले मार्गों पर, जहां बड़ी बसों का संचालन कठिन हो, मिनी बसों की संभावनाओं का आकलन किया जाए। मेट्रो और अंतिम दूरी की कनेक्टिविटी से समन्वय: बस सेवाओं को अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ा जाए। अतिरिक्त बसों का जरूरत के अनुसार पुनः आवंटन: जिन रूटों या परिवहन एजेंसियों को बसों की वास्तविक आवश्यकता है, वहां उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए। अन्य राज्यों में बसें भेजने की संभावना पर भी नियमों के अनुसार विचार किया जाए। नई बसें शामिल करने से पहले जरूरत का आकलन: बसों में यात्रियों की संख्या, ईंधन दक्षता और यातायात पर पड़ने वाले प्रभाव की नियमित निगरानी की जाए। सार्वजनिक परिवहन कम करने की नहीं, व्यवस्था सुधारने की मांग
फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को कम करना नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी, यात्री-केंद्रित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। पत्र में कहा गया है कि बसों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनके उचित इस्तेमाल, वैज्ञानिक रूट प्लानिंग और जरूरत के अनुरूप वाहनों के चयन पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डॉ. एच. सी. गुप्ता ने सरकार से आग्रह किया है कि दिल्ली में DTC बसों की तैनाती की समयबद्ध और वैज्ञानिक समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं।
फेडरेशन ऑफ अशोक विहार (रजि.) के अनुसार, यह संगठन अशोक विहार के चारों फेज की 45 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs) का प्रतिनिधित्व करता है। अब इस मांग पर दिल्ली सरकार और संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर लोगों की नजर रहेगी।
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