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सोनीपत से मुंबई तक का सफर: दीवारों पर सफेदी करने वाले रणजीत दहिया बने मशहूर स्ट्रीट आर्टिस्ट

हरियाणा के सोनीपत में कभी सफेदी का काम करने वाले रणजीत दहिया ने मुंबई की गगनचुंबी इमारतों पर 40 से अधिक बड़े म्यूरल बनाकर अपनी खास पहचान स्थापित की है।

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Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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7 नवंबर 2026 · 9:04 pm1.4 हज़ार व्यूज़
सोनीपत से मुंबई तक का सफर: दीवारों पर सफेदी करने वाले रणजीत दहिया बने मशहूर स्ट्रीट आर्टिस्ट
सोनीपत से मुंबई तक का सफर: दीवारों पर सफेदी करने वाले रणजीत दहिया बने मशहूर स्ट्रीट आर्टिस्ट — Dainik Bhaskar

हरियाणा के सोनीपत जिले से ताल्लुक रखने वाले कलाकार रणजीत दहिया ने मुंबई की बहुमंजिला इमारतों को भारतीय सिनेमा की विरासत से सजाकर कला जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। कभी सोनीपत की गलियों में सफेदी का काम करने वाले रणजीत आज देश के जाने-माने स्ट्रीट आर्टिस्ट हैं। उन्होंने मुंबई में बॉलीवुड हस्तियों के कई विशालकाय म्यूरल तैयार किए हैं, जिनमें बांद्रा स्थित क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की 300 फीट ऊंची पेंटिंग भी शामिल है।

रणजीत दहिया का यह सफर अभावों के बीच शुरू हुआ था। 11वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छूटने पर उन्होंने भैंस चराने और बाद में दीवारों पर सफेदी का काम शुरू किया। सोनीपत के एक निजी स्कूल में सफेदी करते समय उन्हें सरस्वती देवी की पेंटिंग बनाने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने पानीपत में पेंटिंग का काम सीखा और औपचारिक शिक्षा की ओर रुख किया। उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट, चंडीगढ़ से बीएफए किया और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी), अहमदाबाद से कम्युनिकेशन डिजाइन में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की।

वर्ष 2008 में मुंबई पहुंचे रणजीत को जब शहर की दीवारों पर हिंदी सिनेमा की झलक नहीं दिखी, तो उन्होंने खुद इस कमी को पूरा करने की ठानी। वर्ष 2012 में उन्होंने 'बॉलीवुड आर्ट प्रोजेक्ट' की शुरुआत की। इसके तहत उन्होंने अमिताभ बच्चन, मधुबाला, राजेश खन्ना, लता मंगेशकर, ऋषि कपूर और इरफान खान जैसी दिग्गज हस्तियों के चेहरे शहर की ऊंची इमारतों पर उकेरे। वह अब तक 40 से अधिक बड़े म्यूरल बना चुके हैं।

गगनचुंबी इमारतों पर काम करने के बारे में रणजीत बताते हैं कि 100 फीट से अधिक ऊंचाई पर क्रेडल लिफ्ट के सहारे काम किया जाता है। किसी भी प्रोजेक्ट से पहले इमारत की बनावट और कोणों का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है। इसके बाद तीन अलग-अलग कोट में पेंटिंग पूरी की जाती है। इन म्यूरल्स में घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य रंगों का प्रयोग होता है और यह पेंटिंग करीब सात से आठ साल तक सुरक्षित रहती हैं।

रणजीत की कला का विस्तार अब मुंबई की इमारतों से आगे भी पहुंच चुका है। महाराष्ट्र में महा रेल प्रोजेक्ट के तहत 25 रेलवे पुलों पर पेंटिंग का कार्य चल रहा है, जिनमें से वह दो प्रोजेक्ट पूरे कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त उनकी कला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शित हो चुकी है। फ्रांस के ला रोशेल, दक्षिण अफ्रीका के डरबन और पेरिस के 'सैलून डू सिनेमा' जैसे आयोजनों में उनके काम को सराहना मिली है।

कला और अध्यापन के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। रणजीत ने वर्ष 2013 से 2022 तक मुंबई के बलवंत शेठ स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में टाइपोग्राफी और डिजाइन जैसे विषय पढ़ाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कई बड़े मीडिया एवं मनोरंजन प्रोजेक्ट्स के लिए ग्राफिक्स डिजाइनिंग का काम भी किया है।

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