मेरठ में लंबित मांगों को लेकर किसानों का बड़ा प्रदर्शन, कमिश्नरी के बाद कलेक्ट्रेट का घेराव कर धरने पर बैठे
मेरठ में अपनी लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले लगभग दो हजार किसानों ने कमिश्नर और कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में अपनी लंबित मांगों को लेकर किसानों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में लगभग दो हजार से अधिक किसान सुबह करीब सवा 11 बजे कमिश्नरी कार्यालय पहुंचे। अपने हाथों में गन्ना और ज्वार की फसलें लिए किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसानों के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही कमिश्नर कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगवा दिया था। इसके साथ ही मौके पर किसी भी टकराव की स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कार्यालय का मुख्य दरवाजा बंद देखकर प्रदर्शनकारी किसान गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
धरने के दौरान दोपहर करीब साढ़े 12 बजे भाकियू के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि किसान पिछले दो घंटे से धरने पर बैठे हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी उनकी सुध नहीं ले रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 10 मिनट के भीतर कमिश्नर ने आकर ज्ञापन नहीं लिया, तो आगे क्या होगा और किसका गेट टूटेगा, इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी।
इस चेतावनी के कुछ ही देर बाद कमिश्नर के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी किसानों से मुलाकात की। किसानों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासनिक प्रतिनिधि को सौंप दिया। हालांकि, इसके बाद भी किसानों का आंदोलन समाप्त नहीं हुआ।
कमिश्नरी से ज्ञापन सौंपने के बाद किसान लगभग 500 मीटर दूर स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय की तरफ बढ़ गए। इस दौरान किसान अपने हाथों में ज्वार की फसल लेकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। कलेक्ट्रेट पहुंचकर किसानों ने अपने ट्रैक्टर खड़े कर दिए और वहीं धरने पर बैठ गए।
कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि जब तक जिलाधिकारी खुद आकर उनकी समस्याओं को नहीं सुनेंगे, तब तक वे वहां से नहीं उठेंगे। किसानों के इस अड़ियल रुख को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है।
लेखक

टिप्पणियाँ
4आगे क्या होगा वाला हिस्सा वही है जिसे सब छोड़ेंगे और सबको पढ़ना चाहिए।
आख़िरकार, ऐसी कवरेज जो पाठक की समझ का सम्मान करती है। धन्यवाद।
क्षेत्रीय असर पर थोड़ा और होता तो अच्छा था, पर कुल मिलाकर मज़बूत लेख।
संतुलित, अच्छी तरह प्रमाणित रिपोर्टिंग। इसीलिए मैं आज भी ख़बरों के लिए भुगतान करता हूँ।