Monday, May 11, 2026
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डीपफेक और भ्रामक कंटेंट पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: आध्यात्मिक गुरु अनिरुद्धाचार्य महाराज को मिली अंतरिम सुरक्षा

  • दिल्ली दर्पण ब्यूरो
    नई दिल्ली:
    डिजिटल युग में एआई (AI) और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रसिद्ध आध्यात्मिक कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के ‘व्यक्तित्व अधिकारों’ (Personality Rights) के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम और गूगल सर्च जैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर महाराज के खिलाफ प्रसारित किए जा रहे अनधिकृत, भ्रामक और छेड़छाड़ किए गए कंटेंट पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। जस्टिस तुषार राव गेडेला की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि यदि इस प्रकार के कंटेंट के प्रसार को नहीं रोका गया, तो इससे न केवल याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा को बल्कि उनके गरिमा के साथ जीने के अधिकार और निजता को भी अपूरणीय क्षति होगी।

अदालत में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए ‘आश्रया लीगल’ की संस्थापक साझेदार एडवोकेट दीपप्रिया स्नेही और एडवोकेट यशिका कौशिक ने पुरजोर दलील दी कि सोशल मीडिया पर मॉर्फ्ड वीडियो, एआई-जनरेटेड डीपफेक और चुनिंदा रूप से संपादित क्लिप्स के जरिए महाराज के व्यक्तित्व को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। इन वीडियो में उन्हें ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया है जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं, जिससे उनके अनुयायियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और उनकी छवि को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। कोर्ट ने इन दलीलों में मेरिट पाते हुए पाया कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) यह मामला एकतरफा निषेधाज्ञा (ex-parte injunction) के योग्य है। 

सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तकनीक के दुरुपयोग के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हस्तियों की जायज आलोचना और उनके भाषण या पहचान को तकनीकी रूप से तोड़-मरोड़ कर पेश करने में बड़ा अंतर है। जस्टिस गेडेला ने टिप्पणी की कि एआई-संचालित भ्रामक कंटेंट एक गंभीर न्यायिक चिंता का विषय है, जो किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और निजता का हनन करता है। यह आदेश न केवल अनिरुद्धाचार्य महाराज के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही तय करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

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