जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन जारी, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर बढ़ा विपक्षी दबाव
भारी बारिश और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद जंतर-मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी, कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर दिया धरना।

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन रात भर हुई भारी बारिश के बावजूद लगातार जारी है। शिक्षा सुधारों और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह युवा-केंद्रित प्रदर्शन अब राजनीतिक रूप ले चुका है। विपक्षी दलों के समर्थन के बाद इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान किया था, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से कम से कम 60 लोग घायल हुए, जिनमें प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों शामिल हैं। पुलिस ने जंतर-मंतर पर बने मंच और अस्थायी तंबुओं को हटा दिया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने हटने से इनकार कर दिया है और लगातार चौबीसों घंटे धरना दे रहे हैं।
सोमवार की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने राहुल गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया और बाद में छोड़ दिया। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराने में रुचि नहीं ले रही है और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी इस संबंध में मुलाकात की थी। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी। जितेंद्र सिंह के अनुसार, कांग्रेस नेता ने बाद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की नई मांग जोड़कर अपना रुख बदल दिया।
सोमवार की घटना के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस छात्रों को राजनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर सीजेपी का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि सरकार छात्रों को जवाबदेही, सुधार और समाधान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस आंदोलन को उस समय बड़ा समर्थन मिला जब शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून को प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। शनिवार को पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल ले गई, जहां उनका उपवास जारी है। इस आंदोलन की शुरुआत इस साल मुख्य न्यायाधीश की उस टिप्पणी के बाद हुई थी जिसमें उन्होंने 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया था, हालांकि बाद में उन्होंने साफ किया कि यह टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री धारकों के लिए थी।
बिना किसी पंजीकृत राजनीतिक दल के शुरू हुआ यह आंदोलन अब दिल्ली की सीमाओं से बाहर भी फैल चुका है। हाल के दिनों में मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और अहमदाबाद जैसे देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी सीजेपी के समर्थन में प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं।
लेखक

टिप्पणियाँ
2क्षेत्रीय असर पर थोड़ा और होता तो अच्छा था, पर कुल मिलाकर मज़बूत लेख।
संतुलित, अच्छी तरह प्रमाणित रिपोर्टिंग। इसीलिए मैं आज भी ख़बरों के लिए भुगतान करता हूँ।