मुजफ्फरनगर: कई चर्चित मामलों में फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर का फैमिली कोर्ट में तबादला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर को मुजफ्फरनगर की फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया है।
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक अदालत में पीठासीन अधिकारी रहे न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का तबादला कर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के तहत उन्हें अब जिले की फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश (एडीजे) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह अपर सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को फास्ट ट्रैक कोर्ट का कार्यभार दिया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह श्योराण ने इस प्रशासनिक फेरबदल को लेकर शुक्रवार को आधिकारिक आदेश जारी किया। न्याय विभाग द्वारा किए गए इस बदलाव के बाद अब वह पारिवारिक विवादों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई करेंगे।
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर पिछले कुछ महीनों में गंभीर आपराधिक मामलों में सख्त फैसलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान उन्होंने बीते पांच महीनों (6 अप्रैल से 7 सितंबर) के भीतर 10 विभिन्न मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। अपनी कुल 17 वर्षों की न्यायिक सेवा में वह अब तक 35 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं।
बीते 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज वीरेंद्र कुमार सिंह ने उनके न्यायालय से हत्या के 97 मामलों समेत करीब 100 मुकदमों को वापस ले लिया था और उन्हें दूसरी अदालतों में स्थानांतरित कर दिया था। इसके कुछ समय बाद ही जिला जज सेवानिवृत्त हो गए थे। मुकदमों के इस तरह हटाए जाने को लेकर भी जिले के कानूनी हलकों में काफी चर्चा रही थी।
इसके बाद 7 सितंबर को शाहपुर क्षेत्र के शहजादी हत्याकांड में दोषी पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते समय जज दिवाकर ने अपने फैसले में कड़ी टिप्पणी दर्ज की थी। उन्होंने आदेश में लिखा था कि वह मरना पसंद करेंगे लेकिन डरपोक जज कहलाना नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि जब तक वह अपने सिद्धांतों पर काम कर सकते हैं, तब तक ही पद पर रहेंगे, अन्यथा त्यागपत्र दे देंगे।
वर्ष 2009 में न्यायिक सेवा में आए रवि कुमार दिवाकर मुजफ्फरनगर से पहले संभल और बरेली जिलों में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह बरेली से स्थानांतरित होकर पिछले वर्ष 29 नवंबर को मुजफ्फरनगर पहुंचे थे, जहां फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 में रहते हुए उन्होंने शामली और मुजफ्फरनगर के कई संवेदनशील मामलों की सुनवाई पूरी की।
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