अमेरिका: मिडटर्म चुनाव से पहले भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम 30% बढ़ने की आशंका, ट्रम्प की राह भी मुश्किल
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के मद्देनजर भारतीयों के खिलाफ नफरती अपराधों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है, वहीं सर्वेक्षणों में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी पर हार का खतरा मंडरा रहा है।

अमेरिका में आगामी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले अप्रवासी विरोधी माहौल गरमाता जा रहा है और भारतीय समुदाय के खिलाफ हेट क्राइम के मामलों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है। प्रवासियों के मुद्दों से जुड़े संगठन एपीआई के एक अध्ययन के अनुसार, इस साल नवंबर तक भारतीयों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले 58 हजार तक पहुंच सकते हैं। गौरतलब है कि इस साल जुलाई तक ही भारतीयों के खिलाफ नफरती अपराधों के 44,535 मामले दर्ज किए जा चुके थे।
चुनाव के माहौल में भारतीय मूल के कारोबारियों को स्थानीय स्तर पर निगरानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। न्यूयॉर्क के क्वींस में पिछले दो दशकों से रेस्तरां चला रहे भारतवंशी मोमिन अली (बदला हुआ नाम) के अनुसार, ट्रम्प समर्थक श्वेत गुट भारतीय रेस्तरां की जासूसी कर रहे हैं। ये लोग अवैध प्रवासियों के काम करने का दावा कर आव्रजन प्रवर्तन (आईसीई) के अधिकारियों को बुलाते हैं, जिसके चलते होने वाली छापेमारी में कई बार वैध दस्तावेजों वाले भारतीयों को भी पकड़ लिया जाता है।
ऐसी ही एक घटना छोटे कस्बे फ्रेंडशिप में सामने आई, जहां ग्रॉसरी स्टोर चलाने वाले धवल कुमार (बदला हुआ नाम) को आईसीई एजेंटों ने बिना कोई कारण बताए हिरासत में ले लिया। बाद में स्थानीय स्तर पर करीब 200 लोगों द्वारा उनके समर्थन में एक याचिका पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद पांच दिन बाद उन्हें छोड़ा गया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चुनावों के दौरान रिपब्लिकन पार्टी द्वारा प्रवासियों पर स्थानीय लोगों की नौकरियां छीनने का आरोप लगाकर एंटी-इमिग्रेशन का मुद्दा उठाया जाता रहा है।
दूसरी ओर, इन चुनावों में खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी पार्टी के लिए भी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के हारने की संभावना 65 प्रतिशत तक है। यदि पार्टी अमेरिकी कांग्रेस में बहुमत खो देती है, तो ट्रम्प के शेष दो साल के कार्यकाल में टैरिफ, वीजा और अन्य बड़े नीतिगत फैसलों को लागू करने में डेमोक्रेट्स के कड़े विरोध और गतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।
सर्वेक्षणों के अनुसार ट्रम्प के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई, आव्रजन नीति और विदेश नीति से जुड़ी है। एपी-एनओआरसी सर्वे में केवल 32 प्रतिशत लोगों ने माना कि ट्रम्प अर्थव्यवस्था को ठीक से संभाल रहे हैं, जबकि इप्सोस सर्वे में 54 प्रतिशत ने महंगाई को मतदान का मुख्य मुद्दा बताया। इसके अलावा, इमिग्रेशन को लेकर भी 61 प्रतिशत अमेरिकी ट्रम्प की नीतियों से असंतुष्ट हैं, जबकि 20 प्रतिशत मतदाताओं के लिए ईरान युद्ध का घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है।
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