1 जुलाई 2026 :- राजधानी नई दिल्ली दिल्ली पुलिस की साइबर साउथ थाना टीम ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिले से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान समीरन रॉय, प्रिंस शॉ और समर चटर्जी के रूप में हुई है।
महिला से 7.22 लाख रुपये की ठगी
पुलिस के मुताबिक, मामला तब सामने आया जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि साइबर ठगों ने उसे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर घंटों तक जोड़कर रखा और खुद को मुंबई एटीएस (ATS), आईपीएस (IPS) और सीबीआई (CBI) का अधिकारी बताकर उसे “डिजिटल अरेस्ट” में होने का झूठा दावा किया।
आरोपियों ने महिला को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया तथा आरटीजीएस (RTGS) के जरिए 7.22 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर कर दिया।
बैंक खातों की जांच से खुला राज
शिकायत मिलने के बाद साइबर साउथ थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि ठगी की रकम सबसे पहले पश्चिम बंगाल के एक बैंक खाते में भेजी गई और बाद में उसे कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने पश्चिम बंगाल में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
म्यूल बैंक खातों का करते थे इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर ठगों को ‘म्यूल’ बैंक खाते, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़ी अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने (लेयरिंग) और उसके स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था।
बरामद हुआ बड़ा सामान
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने:
- 6 मोबाइल फोन
- 1 लैपटॉप
- 18 डेबिट और क्रेडिट कार्ड
- 15 सिम कार्ड
- बैंकिंग से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़
बरामद किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट से भी हो सकते हैं संबंध
दिल्ली पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में इस गिरोह के तार एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
