दिल्ली: वजीरपुर में जल बोर्ड की बेलगाम मनमानी, 10 दिन में ही धंसा सीवर, ठेकेदारों के भरोसे छोड़ी जनता!
सत्यवती से निमरी कॉलोनी तक जल बोर्ड का भ्रष्टाचार: बिना सूचना सड़कें खोदीं, 1.5 साल से निर्माण अटका जल बोर्ड दफ़्तर के सामने 10 दिन में ही धंसा सीवर: बांस का डंडा गाड़कर छोड़ी जनता की जान जोखिम में

- राजेंद्र स्वामी
नई दिल्ली (दिल्ली दर्पण टीवी एक्सक्लूसिव): वजीरपुर विधानसभा क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरी विधानसभा में जल बोर्ड के ठेकेदार इस कदर मनमानी और घटिया निर्माण कर रहे हैं कि जनता का जीना दूभर हो गया है। जल बोर्ड के अधिकारी, स्थानीय विधायक और निगम पार्षद इस पूरे भ्रष्टाचार और लापरवाही पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
सत्यवती कॉलोनी: बिना सूचना खोदी सड़कें, शिकायतें अनसुनी जल बोर्ड की तानाशाही का आलम यह है कि किसी भी इलाके में बिना किसी पूर्व सूचना या प्लानिंग के सड़कें खोद दी जाती हैं और फिर महीनों तक काम अधूरा छोड़कर छोड़ दिया जाता है।
सत्यवती कॉलोनी में पाइप लाइन बिछाने के काम के दौरान गुणवत्ता में भारी धांधली देखने को मिली। स्थानीय निवासी मोहन बंसल ने काम की घटिया क्वालिटी और बिना किसी रणनीति के जगह-जगह खुदाई करने को लेकर जल बोर्ड के अधिकारियों से कई बार शिकायतें कीं, लेकिन इन शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
निमरी कॉलोनी: जल बोर्ड दफ़्तर के सामने ही भ्रष्टाचार का 'लाइव' नज़ारा निमरी कॉलोनी में तो स्थिति और भी शर्मनाक है। जल बोर्ड कार्यालय के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर सीवर पाइप लाइन बिछाने का काम पिछले डेढ़ साल से कछुआ गति से चल रहा है।
कच्चा और घटिया बेस: सीवर पाइप लाइन डालने के नाम पर केवल खानापूरी की गई। पाइप के नीचे न तो कोई मजबूत बेस (Bedding) बनाया गया और न ही सीमेंट-कंक्रीट का काम किया गया। बस आनन-फानन में मिट्टी डालकर गड्ढों को ढक दिया गया।

10 दिन में टूट गया सीवर: सीवर लाइन पर बनाए गए मैनहोल (सीवर के ढक्कन) की गुणवत्ता इतनी घटिया थी कि निर्माण के महज 10 दिन बाद ही सीवर सड़क के बीचों-बीच धंस कर पूरी तरह टूट गया।
'दिल्ली दर्पण टीवी' के पास भ्रष्टाचार का एक्सक्लूसिव वीडियो साक्ष्य 'दिल्ली दर्पण टीवी' के पास इस पूरे भ्रष्टाचार के दो बड़े वीडियो साक्ष्य (Video Proofs) मौजूद हैं:

पहला वीडियो (निर्माण के समय): इसमें साफ दिख रहा है कि सीवर मैनहोल के नीचे न तो ईंटों की पक्की चिनाई की गई और न ही कोई सीमेंट-प्लास्टर लगाया गया। बिना किसी मजबूत RCC फ्रेम या सपोर्ट के केवल सीमेंट की रिंग रख दी गई।
दूसरा वीडियो (10 दिन बाद): इसमें दिख रहा है कि घटिया सामग्री के कारण पूरा सीवर धंस कर टूट चुका है। लेकिन जल बोर्ड की बेशर्मी देखिए—टूटे हुए सीवर की पक्की मरम्मत करने के बजाय मैनहोल के बीच में बांस का डंडा गाड़कर और कटे हुए प्लास्टिक पाइप डालकर इतिश्री कर ली गई!
मोहल्ला क्लिनिक और MCD गेट के पास हादसे को न्योता :- जिस जगह यह सीवर ढहा है, उसी के ठीक सामने 'आम आदमी मोहल्ला क्लिनिक' और MCD परिसर का मुख्य द्वार है। यहाँ रोजाना सैकड़ों मरीज, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे गुजरते हैं। मुख्य मार्ग के बीचों-बीच खुला पड़ा यह धंसा हुआ मैनहोल किसी भी वक्त जानलेवा हादसे का कारण बन सकता है।
बड़े सवाल: क्या ठेकेदारों की जागीर बन चुका है जल बोर्ड? क्या दिल्ली जल बोर्ड ने वजीरपुर विधानसभा का सारा काम मनमौजी ठेकेदारों के हवाले छोड़ दिया है कि वे जैसा चाहें वैसा घटिया काम करें?
निर्माण के बाद जूनियर इंजीनियर (JE) या असिस्टेंट इंजीनियर (AE) साइट का निरीक्षण करने क्यों नहीं आते?
डेढ़ साल से तड़प रही जनता की सुध लेने के लिए स्थानीय विधायक और निगम पार्षद क्यों खामोश हैं? क्या जनता के टैक्स के पैसे की इस लूट पर जन-प्रतिनिधियों की भी सहमति है?
'दिल्ली दर्पण टीवी' इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है और मांग करता है कि वजीरपुर में हुए इस घटिया सीवर निर्माण की विजिलेंस जांच हो, जिम्मेदार ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
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