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₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? जानिए सरकार के नए नियम की पूरी सच्चाई

₹2,000 से अधिक के हर UPI ट्रांजैक्शन पर टैक्स नहीं लगेगा. नया 0.4% MDR केवल कुछ मर्चेंट (P2M) भुगतान पर लागू होगा. आम लोगों के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे.

Sakshi Jha
Sakshi JhaJournalist
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17 सितंबर 2026 · 1:13 pm1.7 हज़ार व्यूज़नई दिल्ली
₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? जानिए सरकार के नए नियम की पूरी सच्चाई
₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज? जानिए सरकार के नए नियम की पूरी सच्चाई

नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है.सरकार ने ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की घोषणा की है.इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हो गया कि अब ₹2,000 से अधिक के हर UPI ट्रांजैक्शन पर टैक्स देना होगा. हालांकि सरकार ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि यह कोई नया टैक्स नहीं है और इसका असर आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा.

क्या है नया नियम ? सरकार के अनुसार नया MDR केवल व्यक्ति से व्यापारी (Person-to-Merchant या P2M) होने वाले चुनिंदा UPI भुगतान पर लागू होगा.यानी यदि कोई ग्राहक किसी दुकान, मॉल, रेस्टोरेंट, अस्पताल या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान में ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करता है, तो उस लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू हो सकता है. हालांकि इसका भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि संबंधित व्यापारी या पेमेंट सिस्टम के नियमों के अनुसार किया जाएगा.

आम लोगों पर नहीं पड़ेगा असर : सरकार ने साफ किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति (Person-to-Person या P2P) होने वाले सभी UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. यदि आप अपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को ₹5,000, ₹10,000 या इससे अधिक राशि भी UPI के जरिए भेजते हैं, तो आपसे किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क या टैक्स नहीं लिया जाएगा.

सरकार ने MDR क्यों लागू किया? सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में UPI का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.हर महीने अरबों डिजिटल ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, जिनके संचालन, सुरक्षा, तकनीकी ढांचे और रखरखाव पर बड़ी लागत आती है. ऐसे में डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने के लिए बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया गया है. इससे बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और तकनीकी नेटवर्क को संचालन में सहायता मिलेगी.

व्यापारियों की चिंता : सरकार के इस फैसले के बाद कई व्यापारी संगठनों ने चिंता जताई है उनका कहना है कि अतिरिक्त लागत का असर छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है. कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि व्यापारी इस शुल्क का बोझ खुद उठाएंगे तो उनकी लागत बढ़ेगी, जबकि यदि ग्राहक पर डालने की कोशिश करेंगे तो डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल प्रभावित हो सकता है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी.

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों से रहें सावधान : सरकार ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक संदेशों पर भरोसा न करें.₹2,000 से अधिक के हर UPI ट्रांजैक्शन पर टैक्स लगने का दावा पूरी तरह गलत है.नया नियम केवल कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और आम UPI उपयोगकर्ताओं के लिए भुगतान व्यवस्था पहले की तरह आसान और मुफ्त बनी रहेगी.

UPI आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है.सरकार का कहना है कि MDR लागू करने का उद्देश्य लोगों पर टैक्स का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक मजबूत और सुरक्षित बनाए रखना है.ऐसे में आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सही जानकारी के साथ अफवाहों से बचना चाहिए.

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