एमसीडी का बुलडोज़र सिर्फ एक गरीब विधवा के आशियाने पर ही क्यों चला? सावन पार्क में 60 साल पुरानी बस्ती के बीच केवल एक घर जमींदोज, बैकफुट पर निगम प्रशासन
- "ना पार्षद को ख़बर, ना MCD को परवाह! बिना नोटिस बुज़ुर्ग महिला का घर ज़मींदोज़" -निगम अधिकारियों ने साधी चुप्पी, स्थानीय पार्षद को 'खबर ही नहीं'

- पूजा नगर , दिल्ली दर्पण
दिल्ली (केशव पुरम जोन): दिल्ली में इन दिनों भले ही अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोज़र कार्रवाई का दौर देखने को मिल रहा हो, लेकिन केशव पुरम जोन के वार्ड 65 स्थित सावन पार्क से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने नगर निगम की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 60 साल पुरानी एक कच्ची बस्ती (झुग्गी बस्ती) में दर्जनों घरों के बीच अचानक पहुंचे बुलडोज़र ने एक 60 वर्षीय बुजुर्ग विधवा महिला कुसुम का मकान ध्वस्त कर दिया, जबकि आसपास के बाकी कच्चे घरों को छुआ तक नहीं गया।
इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद पीड़ित कुसुम का परिवार पूरी तरह बेघर हो चुका है और वे सड़क पर आने को मजबूर हैं। रो-रोकर बदहवास हुई पीड़ित महिला का कहना है कि यह जमीन उनके परिवार को करीब 55 साल पहले दान (दानपत्र) में मिली थी और इस प्रॉपर्टी से जुड़ा कानूनी विवाद वे अदालत में भी जीत चुकी हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एमसीडी ने बिना कोई पूर्व नोटिस दिए अचानक उनके घर पर बुलडोज़र चला दिया। 'बाकी कच्चे मकान अवैध नहीं, तो केवल मेरा घर ही क्यों?' सड़क पर खुले आसमान के नीचे बैठी कुसुम लगातार एक ही सवाल पूछ रही हैं— "अगर मेरी जगह अवैध थी, तो मेरे अगल-बगल बने बाकी दर्जनों कच्चे मकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या नगर निगम के नियम केवल मेरे और मेरे परिवार के लिए अलग हैं?"
स्थानीय निवासियों में भी इस चयनात्मक कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश है। पूरी बस्ती 60 साल से भी अधिक पुरानी है, ऐसे में दर्जनों परिवारों के बीच सिर्फ एक बुजुर्ग विधवा के घर को निशाना बनाए जाने से कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं।
निगम अधिकारियों ने साधी चुप्पी, स्थानीय पार्षद को 'खबर ही नहीं' इस पूरे विवाद में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर मामले पर दिल्ली नगर निगम का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहा है। प्रशासनिक चुप्पी के बीच जब स्थानीय निगम पार्षद चित्रा विद्यार्थी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो पता चला कि उन्हें क्षेत्र में हुई इतनी बड़ी डिमोलिशन कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर किसकी शह पर बिना किसी नोटिस के एक बुजुर्ग महिला का आशियाना उजाड़ दिया गया? जब MCD के अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं और जनप्रतिनिधि अनभिज्ञता जता रहे हैं, तो सड़क पर आई इस बुजुर्ग विधवा को इंसाफ कौन देगा?


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