जंतर-मंतर प्रदर्शन हिंसा: दिल्ली पुलिस की एफआईआर में हत्या के प्रयास की धारा शामिल
कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है।

राजधानी दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई 15 प्राथमिकियों में से कम से कम एक में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशन में वहां तैनात एक निरीक्षक की शिकायत पर दर्ज किया गया है। एफआईआर में प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने, संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के प्रयास और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस शिकायत के अनुसार, निरीक्षक को कर्तव्य पथ पर तैनात किया गया था। सुबह लगभग 11:30 बजे पुलिस को वायरलेस संदेश के माध्यम से सूचना मिली कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर बढ़ रहे हैं। इसके बाद पुलिस टीम रफी मार्ग स्थित रेल भवन गोलचक्कर के पास बने बैरिकेड्स पर पहुंची, जहां भारी संख्या में भीड़ जमा थी और हजारों अन्य लोग वहां आ रहे थे।
एफआईआर के मुताबिक, लाउडस्पीकर के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार घोषणा की कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है और प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने निर्देशों की अनदेखी की और बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन में घुसने के लिए भड़काऊ भाषण देने शुरू कर दिए।
अधिकारी का आरोप है कि उग्र भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों को घेर लिया और उन पर पथराव तथा चप्पलें फेंकी। शिकायत में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को जान से मारने का प्रयास किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों पर सरकारी संपत्ति और निजी वाहनों को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है।
संसद भवन और अन्य संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्के लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया। इस घटना के बाद मंगलवार सुबह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), 132, 121(1), 191(2) और 324(5) समेत कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को मध्य और दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में हुई झड़पों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस अनधिकृत मार्च को पेशेवर तरीके से संभाला, हालांकि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस को आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है। वायरल वीडियो में सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजते दिखाई दे रहे हैं।
लेखक
टिप्पणियाँ
3आगे क्या होगा वाला हिस्सा वही है जिसे सब छोड़ेंगे और सबको पढ़ना चाहिए।
आख़िरकार, ऐसी कवरेज जो पाठक की समझ का सम्मान करती है। धन्यवाद।
क्षेत्रीय असर पर थोड़ा और होता तो अच्छा था, पर कुल मिलाकर मज़बूत लेख।