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उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा: भजनपुरा में पुलिस पर हमले के मामले में पांच दोषी करार, आगजनी के आरोपों से बरी

कड़कड़डूमा अदालत ने गैरकानूनी सभा और पुलिसकर्मियों पर हमले के मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया, सजा पर बहस 16 सितंबर को होगी।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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12 सितंबर 2026 · 6:49 am188 व्यूज़
उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा: भजनपुरा में पुलिस पर हमले के मामले में पांच दोषी करार, आगजनी के आरोपों से बरी
उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा: भजनपुरा में पुलिस पर हमले के मामले में पांच दोषी करार, आगजनी के आरोपों से बरीHindustan Times

कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में पांच लोगों को दोषी ठहराया है। अदालत ने इन आरोपियों को दंगा भड़काने, गैरकानूनी रूप से भीड़ जुटाने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करने का दोषी पाया है। इस मामले में दोषियों की सजा पर बहस के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की गई है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने अपने फैसले में आरिफ, मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, तनवीर अली और हुनैन को दोषी करार दिया। यह मामला 24 फरवरी 2020 को भजनपुरा पेट्रोल पंप के पास हुई हिंसा से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जुटी भीड़ ने सड़क का डिवाइडर पार कर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया था।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत ने सबूतों के आधार पर माना कि पेट्रोल पंप के पास लगभग 100 से 150 लोगों की भीड़ एकत्र हुई थी, जिसका साझा उद्देश्य दंगा और उपद्रव करना था। गवाहों के बयानों से यह पूरी तरह साबित हुआ कि पांचों आरोपी उस गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे और उन्होंने सरकारी काम में बाधा डाली।

अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत दोषी ठहराया, जो दंगा करने और लोक सेवकों पर हमला करने से जुड़ी हैं। इन धाराओं के तहत अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि, अदालत ने पेट्रोल पंप और वाहनों को आग लगाने तथा गंभीर चोट पहुंचाने जैसे संगीन आरोपों से इन पांचों को बरी कर दिया।

अदालत ने कहा कि दिल्ली अग्निशमन सेवा की रिपोर्ट से यह साबित नहीं हो सका कि कथित समय पर पेट्रोल पंप में आग लगाई गई थी। इसके साथ ही जांच अधिकारी की लापरवाही पर भी अदालत ने टिप्पणी की। कोर्ट ने रेखांकित किया कि वाहनों को आग लगाने की बात गवाहों ने कही थी, लेकिन जांच अधिकारी उन वाहनों की पहचान करने और उनके मालिकों से पूछताछ करने में विफल रहे।

सबूतों के अभाव के चलते आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप खारिज कर दिए गए। इसके बावजूद, पुलिस पर हमला करने और अशांति फैलाने के मामले में आरोपियों की संलिप्तता पूरी तरह सिद्ध पाई गई, जिसके आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया है।

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