निजामुद्दीन गोलीबारी मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी मोहम्मद शाहरुख की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज
हजरत निजामुद्दीन इलाके में मारपीट और गोलीबारी के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने हजरत निजामुद्दीन क्षेत्र में हुई मारपीट और गोलीबारी की घटना के आरोपी मोहम्मद शाहरुख की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज घटना में आरोपी की सक्रिय संलिप्तता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए रेखांकित किया कि वीडियो फुटेज में शाहरुख एक गमला हाथ में पकड़े हुए और उसे दुकान की तरफ फेंकते हुए नजर आ रहा है। पीठ ने कहा कि साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को गिरफ्तारी पूर्व राहत नहीं दी जा सकती।
यह मामला बस्ती हजरत निजामुद्दीन स्थित एक परफ्यूम की दुकान में एक अगस्त 2025 की रात करीब 10 बजे हुई वारदात से जुड़ा है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, मुख्य आरोपी अहसान अपने बेटों सैफ और सहनूर के साथ जबरन दुकान के भीतर घुस आया था। वहां गाली-गलौज करने के साथ मारपीट की गई और पिस्टल से गोलियां भी चलाई गईं, जिसमें एक गोली शिकायतकर्ता के भाई के पैर में लगी थी।
याचिकाकर्ता शाहरुख के वकील ने अदालत में दलील दी कि घटना के समय दर्ज मूल प्राथमिकी में उनके मुवक्किल का नाम शामिल नहीं था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि शाहरुख एक छात्र है और उसका पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है, इसलिए उसे अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ही शाहरुख की पहचान सुनिश्चित की थी। पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके आवास और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन वह फरार मिला और जांच में शामिल नहीं हुआ।
अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि निचली अदालत ने चार अगस्त 2026 को आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद लगातार गैरहाजिर रहने पर उसे भगोड़ा घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया 20 अगस्त को शुरू की जा चुकी है। इन तमाम तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी।
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