यौन उत्पीड़न के आरोपों पर घिरे जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर व सांसद अकोइजम, भाजपा ने की संसद से निलंबन की मांग
कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है, वहीं भाजपा ने राष्ट्रपति से उनके निलंबन की गुहार लगाई है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से निष्कासित प्रोफेसर और कांग्रेस के लोकसभा सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपने खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को मणिपुर और पूर्वोत्तर के मुद्दों पर उनकी आवाज दबाने की नीयत से चलाया गया अभियान बताया है।
इन्नर मणिपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले अकोइजम ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उनका दावा है कि उनसे जुड़े विवाद का आधार अकादमिक और शिक्षण संबंधी विषय थे, जिन्हें यौन उत्पीड़न का रूप देकर नियमों की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की गई। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा की गई बर्खास्तगी को कानूनी रूप से चुनौती देने की बात कही है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल ने संसद से अकोइजम के निलंबन की मांग उठाई है। भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रूप कुमारी चौधरी ने बताया कि राष्ट्रपति ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इस मामले में जेएनयू प्रशासन ने 9 अक्टूबर को अकोइजम की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के प्रोफेसर रहे अकोइजम के खिलाफ मई के महीने में कम से कम 11 छात्रों ने यौन दुराचार की लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं। प्रशासन ने जांच के बाद यह कड़ा कदम उठाया था।
विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने भी सोमवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की कानूनी पहलुओं से जांच कर रही है, जिससे सांसद की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
अपने बचाव में अकोइजम का कहना है कि पूर्वोत्तर के लोगों को खामोश रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में हेरफेर किया गया क्योंकि उनके खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं बनता था।
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