JNU में भूख हड़ताल से बढ़ा तनाव, 13 मांगों पर अड़े छात्र; प्रशासन से समाधान की मांग
JNU में छात्रसंघ की भूख हड़ताल जारी। 13 सूत्रीय मांगों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, बिगड़ती सेहत और प्रशासन से बातचीत के बीच जानिए पूरा मामला।

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्रसंघ की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को लेकर परिसर में तनाव बना हुआ है। छात्र अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 3 अक्टूबर से शुरू हुई भूख हड़ताल के कारण आंदोलनरत छात्रों की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। छात्रसंघ का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं छात्रसंघ की प्रमुख मांगें? छात्रसंघ की मांगों में चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (CPO) मैनुअल को वापस लेना, निष्कासित छात्र नेताओं की बहाली, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (JNUEE) को दोबारा शुरू करना और यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए GSCASH समिति की बहाली शामिल है। इसके अलावा छात्र हॉस्टल सुविधाओं में सुधार, लाइब्रेरी में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक मुद्दों का समाधान भी चाहते हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि उनकी मांगों को लंबे समय से गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
भूख हड़ताल से छात्रों की सेहत पर असर छात्रसंघ के अनुसार, लगातार भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की शारीरिक स्थिति प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारियों का वजन कम होने और ब्लड शुगर के स्तर में गिरावट आने जैसी समस्याओं की बात सामने आई है। वहीं, बड़ी संख्या में अन्य छात्र भी रिले भूख हड़ताल के जरिए आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान कराना है।
तीन दौर की बातचीत के बाद भी गतिरोध छात्रसंघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ तीन दौर की बातचीत के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। छात्र नेताओं ने कुलपति से सीधे हस्तक्षेप करने और जल्द समाधान निकालने की अपील की है। इस बीच 200 से अधिक छात्रों ने रिले भूख हड़ताल में भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया है। छात्रसंघ ने दावा किया है कि अनशन पर बैठे छात्रों का वजन चार किलोग्राम से अधिक घट चुका है। हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रसंघ बातचीत के जरिए सहमति बना पाएंगे या यह आंदोलन और लंबा चलेगा? फिलहाल छात्रों की सेहत और विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
रिपोर्ट: दिल्ली दर्पण टीवी | नई दिल्ली
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