जंतर-मंतर पर पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी: नोएडा में फरीदाबाद की महिला पर ज़ीरो एफआईआर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में नोएडा पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जुलाई को आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में नोएडा पुलिस ने एक महिला के खिलाफ ज़ीरो एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी महिला मूल रूप से फरीदाबाद की रहने वाली है। यह घटनाक्रम दिल्ली के संसद मार्ग थाना क्षेत्र का होने के कारण केस डायरी आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दी गई है।
गाजियाबाद के वसुंधरा की निवासी और सुप्रीम कोर्ट की 32 वर्षीय अधिवक्ता स्मृति सिंह की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। शिकायत मिलने के बाद नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन में बुधवार रात भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इसमें धारा 352 (जानबूझकर अपमान), 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान) और 356(1) (मानहानि) शामिल हैं।
नोएडा की अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) मनीषा सिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोपी महिला के नोएडा स्थित सेक्टर 168 में रहने की बात कही थी। हालांकि, पुलिस सत्यापन के दौरान पाया गया कि सेक्टर 168 की एक सोसायटी में महिला का फ्लैट तो है, लेकिन वह वर्तमान में खाली पड़ा है। जांच में सामने आया कि आरोपी महिला फिलहाल फरीदाबाद के ऊंचा गांव में रह रही है।
एडीसीपी मनीषा सिंह के अनुसार, चूंकि कथित घटना सेंट्रल दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई थी, इसलिए नियमानुसार ज़ीरो एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बाद मामले की पूरी केस डायरी नई दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन को आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
अधिवक्ता स्मृति सिंह ने अपनी शिकायत में कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला ने सार्वजनिक रूप से देश के प्रधानमंत्री और उनकी माताजी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इस कृत्य का मुख्य उद्देश्य समाज में नफरत फैलाना, शांति भंग करना और संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाना था।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर इस वीडियो के प्रसारित होने के बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया। उनका कहना था कि केवल व्यूज और फॉलोअर्स पाने के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
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