एशियाई खेलों में 3 पदक जीतने वाले पैरा तैराक हिमांशु नांदल का रोहतक में जोरदार स्वागत, सरकार ने दी नौकरी
जापान में तीन कांस्य पदक जीतकर लौटे रोहतक के तैराक हिमांशु नांदल को हरियाणा सरकार ने सवा दो करोड़ रुपये और ग्रुप-बी की सरकारी नौकरी से सम्मानित किया है।
जापान में आयोजित एशियाई खेलों में तैराकी स्पर्धा में तीन कांस्य पदक जीतने वाले पैरा खिलाड़ी हिमांशु नांदल का रोहतक पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। हरियाणा सरकार ने इस शानदार उपलब्धि के लिए उन्हें सवा दो करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि और ग्रुप-बी की सरकारी नौकरी प्रदान की है। 30 अक्टूबर को भिवानी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया।
पदक जीतकर गृह जनपद लौटने पर हिमांशु के सम्मान में स्थानीय लोगों ने एक विशाल जुलूस निकाला। उन्हें शीला बाईपास से गांव बोहर स्थित नांदल भवन तक गाड़ियों और ट्रैक्टरों के लंबे काफिले के साथ लाया गया। इस दौरान ग्रामीणों और खेल प्रशंसकों ने पैरा तैराक को फूलों और नोटों की मालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया।
लगभग 23 वर्षीय हिमांशु नांदल ने जापान में आयोजित एशियाई खेलों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए तीन कांस्य पदक हासिल किए। इन पदकों के साथ ही उन्होंने वर्ष 2028 में होने वाले पैरा ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2024 के पैरा ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया था, लेकिन कोटा न मिलने के कारण वह उस प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सके थे।
ओलंपिक में भाग लेने से चूकने के बावजूद हिमांशु ने अपना अभ्यास जारी रखा और वर्ष 2025 में आयोजित वर्ल्ड पैरा चैंपियनशिप में 7वीं रैंक हासिल की। तैराकी के क्षेत्र में उनका यह सफर हाल ही में शुरू हुआ है। उन्होंने वर्ष 2021 में तैराकी की शुरुआत की थी और बेहद कम समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
तैराकी में आने से पूर्व हिमांशु वर्ष 2018 से 2021 तक जूडो के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रहे हैं। जूडो में उन्होंने 15 बार राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीते और छह बार नेशनल चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया। खेलों में उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा है। उनके पिता बलवान सिंह नांदल हरियाणा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं, जबकि उनकी छोटी बहन तनवी अंडर-15 एशियन गेम्स में जूडो की रजत पदक विजेता हैं।
गांव के स्थानीय निवासी एडवोकेट सतीश कौशिक ने कहा कि हिमांशु की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर वैश्विक खेल मंच पर पदक हासिल करना पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है।
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