दीपावली का वास्तविक संदेश: अंतर्मन में भी जलाएँ ज्ञान और विवेक का दीप
पूज्य संत सुरेश भैयाजी का आध्यात्मिक संदेश, ध्यान योग संस्था एवं अखिल भारतीय संतमत सत्संग, दिल्ली की ओर से समाज को प्रेरणादायक संदेश

नई दिल्ली। दीपावली केवल दीप जलाने, घरों को सजाने और उत्सव मनाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और जीवन में ज्ञान, विवेक तथा सद्गुणों का प्रकाश फैलाने का भी पावन अवसर है। यही संदेश पूज्य संत सुरेश भैयाजी ने दीपोत्सव के अवसर पर अपने आध्यात्मिक संदेश में दिया है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दीपावली पर लोग अपने घरों की सफाई कर उन्हें प्रकाश से आलोकित करते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने अंतर्मन की भी सफाई करनी चाहिए। मन में वर्षों से संचित काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष जैसे विकारों को दूर किए बिना जीवन में वास्तविक प्रकाश का अनुभव संभव नहीं है। सत्व, रजस और तमस का संतुलन आवश्यक अपने संदेश में पूज्य संत सुरेश भैयाजी ने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रत्येक मनुष्य के जीवन पर तीन गुणों—सत्व, रजस और तमस—का प्रभाव रहता है।

उन्होंने कहा कि सत्व गुण ज्ञान, पवित्रता, प्रेम, करुणा और विवेक का प्रतीक है, जबकि रजोगुण कर्मशीलता और महत्वाकांक्षा से जुड़ा है। वहीं तमोगुण आलस्य, प्रमाद और अज्ञान का कारण बनता है। जब जीवन में असंयम, भोग-विलास और नकारात्मकता बढ़ती है, तब सत्व गुण का प्रभाव कम होने लगता है और मनुष्य अपने वास्तविक उद्देश्य से भटक जाता है। मन को भी चाहिए शुद्धता और प्रकाश संत सुरेश भैयाजी ने कहा कि जैसे एक दीपक को निरंतर जलते रहने के लिए स्वच्छ तेल और उचित बाती की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन को भी सत्संग, ध्यान, आत्मचिंतन और संयम की आवश्यकता होती है।
उन्होंने बताया कि काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकार मनुष्य की शांति और विवेक को कमजोर कर देते हैं। ऐसे में केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता भी उतनी ही आवश्यक है। दीपावली पर लें सकारात्मक संकल्प अपने संदेश में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस दीपावली केवल बाहरी रोशनी तक सीमित न रहें, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प भी लें।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अज्ञान के स्थान पर ज्ञान, क्रोध के स्थान पर क्षमा, लोभ के स्थान पर संतोष, अहंकार के स्थान पर विनम्रता तथा ईर्ष्या-द्वेष के स्थान पर प्रेम, करुणा और सद्भावना को अपनाएँ। साथ ही सेवा और परोपकार को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का भी संदेश दिया। सच्ची दीपावली अंतर्मन के प्रकाश में पूज्य संत सुरेश भैयाजी ने कहा कि सच्ची दीपावली तभी है, जब मनुष्य के विचार पवित्र हों, व्यवहार मधुर हो और उसके कर्म समाज तथा मानवता के कल्याण के लिए प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक छोटा-सा दीपक गहरे अंधकार को दूर कर देता है, उसी प्रकार ज्ञान का एक विचार, प्रेम का एक भाव और सेवा का एक छोटा-सा कार्य भी किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

उन्होंने सभी से अपने हृदय में ज्ञान, विवेक और सद्भावना का दीप जलाने तथा सत्य, प्रेम, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
अंत में ध्यान योग संस्था, अखिल भारतीय संतमत सत्संग, दिल्ली एवं पूज्य संत सुरेश भैयाजी की ओर से देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए प्रार्थना की गई कि यह दीपोत्सव प्रत्येक परिवार में प्रेम, प्रत्येक हृदय में ज्ञान और संपूर्ण समाज में सुख, शांति तथा मंगल का संदेश लेकर आए।
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