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महिला की बहादुरी ने बचाई 4 बच्चों की जान

दिल्ली के शालीमार गांव में एक ज्योति सैनी नाम की महिला ने अपनी समझ व बहादुरी से 4 स्कूली छात्रों की जान बचाई। ये महिला शाम के करीब  6 बजे कहीं जा रही थी। जैसे ही ये घर से बहार निकली तभी वहां एक लड़का आया और उनकी छत पर चला गया उन्होंने उस बच्चे को रोकने की कोशिश भी की पर वह उनकी बात को अनसुना करके ऊपर की और बड़ गया। इसके तुरंत बाद उन्हें अपनी गली में शोर सुनाई दिया उन्होंने जब देखा तो लगभग 70 – 80 स्कूली बच्चे उनके घर के सामने खड़े होकर 4 -5 बच्चों को मारने की कोशिश कर रहे थे। ये देखकर ज्योति उनके बच्चे तथा उनके घर में रहने वाली किरायेदार के होश उड़ गए। 

 
अंदाज़ा लगाया जा रहा है की इन बच्चों की आपस में रंजिश चल रही थी। इसलिए कम से कम 70 – 80 बच्चे मात्र 4 -5 बच्चों को मारने के लिए आ रहे थे इनके हाथों में हथियार भी थे किसी के हाथ में डंडा तो किसी के हाथ में लाठी थी। जब ज्योति ने ये सारा मंज़र देखा तो उन्होंने परिस्थिति को सँभालने की काफी कोशिश की उन्होंने उन चारों बच्चों को अपने घर में बंद कर दिया और बाकि के लड़कों को जो की संख्या में ज़्यादा थे समझाने की कोशिश की पर उन्होंने उनकी एक नहीं सुनी, उल्टा उनसे ही हाथा पाई करने लगे ज्योति ने स्तिथि सुधारने चाही परन्तु बच्चे इतने गुस्से में थे की किसी की बात सुनने की जगह अपना आवेश खोकर बार बार घर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बार बार बच्चों को पकड़ कर घर से बाहर निकला पर वो किसी तरह घर के अंदर घुसकर उन 4 बच्चों के साथ मार पीट करना चाहते थे। इस आपा धापी में ज्योति को भी कुछ अंदरुनी छोटें आई हैं। पर वो उन शैतान बच्चों को भागने में समर्थ रहीं। 
 
हैरत की बात तो ये है की ज्योति उन बच्चों से अकेले ही भीड़ गई पर उनकी गली का कोई भी शख्स उनका साथ देने नही आया इसके विपरीत सभी अपने घरों में छुप गए। और जो बहार थे भी वो इस मंज़र को तमाशे की तरह देखते रहे। क्या हम इस समाज को सभ्य समाज कह सकते है की जहाँ एक महिला इतने सारे बच्चों से इतनी बहादुरी से लड़ रही है वहां इस महिला की सहायता करने के लिए एक भी हाथ आगे नही बड़ा। और इससे भी बड़ी हैरानी की बात तो ये है की इस दौरान पुलिस को भी फोन किये गए पर पुलिस का आज तक कोई पता नही है। ज्योति के अनुसार पुलिस को 6 बार फोन किया गए  है पर पुलिस ने अभी तक कोई खबर नहीं ली है। क्या हम अभी भी सच सकते हैं की हम पुलिस को ज़िम्मेदार कह सकते है जो नागरिक को आश्वस्त करा सके की वो हमेशा हर स्तिथि में उनकी सहायता करेगी। 
 
इस सब विषय पर ज्योति का कहना है की वो ऐसी स्थिति से डरतीं नही है क्योंकि वो उत्तर प्रदेश की रहने वाली है और वहाँ ऐसी घटनाये होना आम बात है। ज्योति कहती है की मैं हर समय मुश्किलों का सामना करने तथा दूसरों की सहायता करने के लिए आगे रहती हूँ पर यदि इस तरह का जंगल राज हो रहा हो और उनकी सहायता करने के लिए आम जनता तो क्या पुलिस तक नहीं ए तो उन्हें बहुत दुःख होता है। एक चश्मदीद कमल जहाँ का कहना है की ज्योति उन बच्चों से अकेली लड़ रही थी उनकी सहयता के लिए न आम जनता आगे आई और नहीं फोन करने पर पुलिस ही आई ऐसी स्तिथि में हम कैसे मान ले की हम देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षित हैं। 
 
रही बच्चों की बात तो बच्चों का यह रवैया सचमुच हैरान करने वाला है क्योंकि जिस शिक्षा के मंदिर में वो पड़ने जाते है वहां लड़ाई झगड़ा सीख रहे हैं इसके लिए उनके अभिभावकों तथा शिक्षकों को चाहिए की उन्हें अच्छी तालीम दे व सही मार्ग पर चलने को कहें उन्हें शुरू से ही प्यार व भाई चहरे का पाठ पड़ना ज़रूरी है तभी देश के बच्चे देश का सुनहरा भविष्य बन पायेंगें।  

 

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