Sunday, May 19, 2024
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 कभी जीवनदाता कहलाने वाला एम्स बना राजनीति का अखाड़ा

 
देश के कोने-कोने में एम्स खोलने की बात कही जा रही है । ऐसा लग रहा है मानो देश का सबसे बड़ा हॉस्पिटल राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया है । सच्चाई ये है कि एम्स में कुछ दिन पहले डिलीवरी के दौरान एक नर्स की मौत हो गई थी।  इस दर्दनाक घटना के बाद ऐसा बवाल मचा जिसकी गूंज आज भी सुनाई दे रही है । हद तो तब हो गई जब कुछ वैसी हीं गलती एक बार फिर से हुई। पर इस बार बस गनीमत ये रही कि एम्स के डॉक्टर माँ और बच्चे की जान बचानें में कामयाब रहे । लेकिन ये बात खुद डॉक्टर भी मानते हैं कि मौजूदा वक्त में मरीज़ों की सलामती के लिए डॉक्टर कम, भगवान का करिश्मे ज्यादा काम आ रहे हैं । एक ऑपरेशन के लिए तिसरे फ्लोर से आठवे फ्लोर तक दौ़ड़ना पड़ता है, ऐसे में काफ़ी वक्त बर्बाद होता है । यहां के डॉक्टर्स भी यहां की खामियों को लेकर बेहद परेशान हैं ।
इन सभी दिक्कतों को लेकर यहां के डॉक्टर्स नें लगातार कई दिनों तक प्रशासन के उच्च पद पर आसीन अधिकारियों को मेल भी किए, यहाँ तक की प्रदर्शन भी हुए। लेकिन अभी तक कोई  रास्ता नहीं निकला। अक्सर ऐसा होता है कि मरिज के परिजन ऐसी स्थिती में नाराज हो जाते हैं, ईन बेकसुर डॉक्टरों की पिटाई तक हो जाती है। ईतना हीं नहीं, ऐसी गड़बड़ी के बाद खूद ईन्हीं डॉक्टरों को सस्पेण्ड और टर्मिनेट भी कर दिया जाता है।  जाहिर है, ऐसी स्थिती में किसी भी डॉक्टर के लिए काम करना खतरे से खाली नहीं, साथ हीं उनका कैरियर भी बर्बाद हो जाता है।
 अपनें हीं प्रशासन के खिलाफ ईस आवाज को एम्स और सरकार सुनती है, या ईसे दबाती है, ये देखना होगा।  क्योंकि दूर-दूर से यहां लोग अच्छे स्वास्थ्य की तलाश में आते हैं । जरूरत है ये अस्पताल लोगों को जीवनदान करे, ना कि उन्हें मौत के हवाले कर दें ।
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