Thursday, May 23, 2024
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मीडिया, साँझा परिवार, पुलिस ने दिलाया बुज़ुर्ग महिला को न्याय

76 साल की बुजुर्ग महिला पुष्पा शर्मा रोहिणी सेक्टर सात के डाकघर पर आई है और इस तरह एक साल से यहा आ रही है। ये निसंतान है और पति की कई साल पहले मौत हो चुकी है। इनके पति भी ढाक विभाग में ही पोस्ट मास्टर थे जिनकी मौत के बाद ये बुजुर्ग इस दुनिया में अकेली रह गई। ये आजकल काफी बीमार है और इनकी हालत ऐसी है जिसे देखकर किसी को भी रहम आ जाए पर डाक विभाग को रहम नही आया। कोई भी परेशानी हो तो इनके पास कोई पैसा नही क्योकि इनको एक साल से पेंशन ही नही मिल रही। ये जब भी रोहिणी सेक्टर 7 के डाकघर में आती। तो कर्मचारी कभी कम्प्यूटर खराब होने की बात कह देते तो कभी नोटबंदी का बहाना बना देते। ये बुजुर्ग चल नही सकती और ऐसे में पुलिस या फिर खुद ढाक विभाग की जिम्मेदारी है की इनकी पेंशन घर जाकर दी जाए। लेकिन घर जाकर पेंशन देना तो दूर ये आज यहाँ आई तो इनको बोला गया की वे अपना अलग अकाउंट खुलवाये तभी उन्हें पेंशन दी जायेगी। बुजुर्ग महिला अधिकारी को शिकायत कर नही पा रही थी क्योकि अधिकारी साहब उपर की मंजिल पर बैठते हैं। ये पैदल भी मुश्किल से चल पा रही है तो उपर सीढियों से कैसे चढ़ पाती। इसलिए इन्हें एक साल से परेशान किया जा रहा है। महिला के पति इसी डाकघर के पोस्ट मास्टर थे लेकिन पोस्ट मास्टर साहब इस दुनिया में नही रहे तो कर्मचारियों ने उनके परिवार को भी भुला दिया ।
आज जब इस बुजुर्ग को पेंशन से मना किया गया और इनका खाता भी नहीं खोला गया तो लोगो ने पुलिस और मीडिया को कॉल की। ऐसी स्थिति में इस महिला के लिए आवाज़ उठाई साँझा परिवार नाम की सामाजिक संस्था ने। इस संस्था के महासचिव ओपी मल्होत्रा 2008 से निःस्वार्थ भाव से पुष्पा शर्मा की मदद कर रहे हैं…जिससे अभी तक ये अपना गुज़र बसर करने में सक्षम हो पायी हैं। जब पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी गयी तो पुलिस मौके पर पहुची और आश्वासन दिया की महिला को पुलिस अपनी गाडी से लेकर जायेगी और खुद पेन्शन दिलवाएगी। इसके बाद जब पुलिस ने डाकघर अधिकारी से इस बाबत पूछा तो अधिकारी ने बताया कि वो उपर की मंजिल पर बैठते है इसलिए उन तक महिला की समस्या नही पहुंची। उन्होंने कहा कि साथ आये लोग लिखित में शिकायत दें। वो दोषी कर्मचारी पर कारवाई करेंगे साथ ही उसी वक्त पोस्टमास्टर साहब ने बुजुर्ग का अकाउंट खुलवा दिया।
जो काम डाक विभाग के कर्मचारियों को वरीयता के हिसाब से सबसे पहले करना चाहिए था वो काम आज किया गया वो भी मीडिया, साँझा परिवार और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जो वास्तव में पूरे डाक विभाग को शर्मसार करने वाली बात है।

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