Gang war of Tillu Gogi Gang : टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी की दोस्ती दुश्मनी में बदलते ही शुरू हो गया था खून का खेल 

25 से ऊपर जान ले चुकी है टिल्लू ताजपुरिया और गोगी गैंग की गैंगवार 

टिल्लू और गोगी की हत्या के बाद भी नहीं रुक रहा है हत्याओं का सिलसिला 

राजेंद्र स्वामी/दिल्ली दर्पण टीवी 

नई दिल्ली। आतंक की पर्याय बन चुकी टिल्लू और गोगी गैंग का मकसद सिर्फ एक ही रहा है कि एक दूसरे के आदमियों को तब तक मारते जाओ जब तक कि दोनों में से किसी एक गिरोह का नामो निशान ही न मिट जाये। दरअसल टिल्लू और गोगी की दोस्ती से दुश्मनी बदलने की दास्ताँ बड़ी दिलचस्प है। दोनों ही गैंगवार ऐसी कि एक फिल्म बन जाये। 



कभी एक दूसरे के लिए मरने मिटने वाले दोस्त रहे गोगी और टिल्लू के बीच जान लेवा दुश्मनी कैसे हो गई और वो कैसे दोनों दोस्त एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए ? यह कहानी लोगों के समझ से बाहर है। 

दरअसल बात 21 मई 2015 की है जब दिल्ली अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी। कोई नहीं जानता था कि इस दिन दो जिगरी दोस्तों के बीच दुश्मनी की एक ऐसी लकीर खिंच जाएगी, जो पूरी दिल्ली को इंसानी लहू से रंग देगी। ये वह दिन था जब इस दुश्मनी में पहली लाश गिरी थी। जी हां इस दुश्मनी में पहला वार गोगी ने किया था… उसने टिल्लू के एक साथी राजू का कत्ल कर दुश्मनी के बारूद को चिंगारी को हवा दे दी थी। 

टिल्लू ने भी राजू की मौत का बदला गोगी के दोस्त अरुण गोगी और मंजीत को मौत के घाट उतारकर ले लिया। टिल्लू ने एक बदले दो की लाश गिराई लेकिन टिल्लू का बदला अब भी कम नहीं हुआ था। इसके बाद उसने गोगी के एक और रिश्तेदार निरंजन मास्टर का भी खून कर दिया। अपने 3 आदमी मारे जाने के बाद अब गोगी भी खामोश नहीं रह सकता था। उसने भी हरकत में आते हुए दिल्ली के अलीपुर में टिल्लू के दोस्त सुमित की हत्या कर दी। इस बार गोगी भी एक कत्ल पर नहीं रुका सुमित के बाद उसने टिल्लू के रिश्तेदार देवेंद्र प्रधान  को गोली से उड़ा दिया। अगला जवाबी हमला टिल्लू  का था। उसने गोगी के एक और दोस्त अंकित की लाश गिरा दी। इसके जवाब में गोगी ने दिल्ली के स्वरूप नगर में टिल्लू के खास आदमी दीपक को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद टिल्लू को एक और चोट पहुंचाने के लिए गोगी ने सोनीपत की गायिका हर्षिता दहिया की हत्या कर दी।

हर्षिता टिल्लू की करीबी बताई जाती थी। इसके बाद गोगी ने अगला कत्ल टिल्लू के करीबी रवि भारद्वाज का दिल्ली के प्रशांत विहार में किया। गोगी की लगातार चोट से तिलमिलाए टिल्लू ने मौका देखकर प्रीतमपुरा में गोगी के खास आदमी मोनू नेपाली की जान ले ली। इस गैंगवार तब खतरनाक रूप ले लिया, जब रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र गोगी की हत्या कर दी गई। शक टिल्लू ताजपुरिया गैंग पर ही जाना था। तभी से टिल्लू ताजपुरिया की हत्या की योजना गोगी गैंग बनाने लगी थी। सोशल मीडिया पर एक दूसरे की जान लेने की धमकी सरेआम दी जा रही थी। यही वजह रही कि टिल्लू ताजपुरिया को मंडोली जेल लाकर तिहाड़ जेल में बंद किया गया था। तिहाड़ जेल की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली 9 नंबर बैरक में टिल्लू तजपुरिया को रखा गया था पर यहां पर भी टिल्लू ताजपुरिया की हत्या कर दी गई। अब टिल्लू ताजपुरिया के सबसे करीबी अमित दबंग के भाई मोहित उर्फ़ बंटी ने आत्महत्या कर ली। मतलब गोगी और टिल्लू के मारे जाने के बाद भी यह गैंगवार रुकने का नाम नहीं ले रही है। एक दूसरी की जान लेने का सिलसिला यूं ही बदस्तूर जारी है।

  पुलिस की जानकारी के मुताबिक टिल्लू जेल के भीतर से ही गोगी गैंग के 4 सदस्यों का कत्ल करवा  चुका था। यानी जेल की चारदीवारी भी इस दुश्मनी को रोकने में नाकाम साबित हो रही थी। पिछले पांच साल में ही इस दुश्मनी में 25 से ज्यादा लोगों की बलि चढ़ा दी गई। 

इन दोनों गिरोह के सिर पर सवार खून को देखते हुए दिल्ली पुलिस की बेबसी भी समझी जा सकती है। पुलिस लगातार कोशिश कर रही है कि कत्लोगारत के इस सिलसिले को किसी तरह से रोका जा सके, लेकिन अब तक वो कुछ भी ठोस करने में नाकाम हई साबित हुई है। पुलिस ज्यादा से ज्यादा ये कर पाई है कि वो इन गिरोहों को हासिल होने वाली फंडिंग पर चोट करने में थोड़ी बहुत कामयाब हो पाई है। तो लगे हाथ अब ये भी जान लीजिए कि आखिर इन दोनों गैंग के पास हथियार और खर्चे के लिए  पैसा कहां से आता है। 

दरअसल ये दोनों ही गिरोह लूटपाट और डकैतियां बेहद कम डालते हैं। इनकी फंडिंग दिल्ली के कुछ पैसे वाले फाइनेंस करते हैं। इन्हीं फाइनेंसरों से हासिल पैसे से ये गिरोह हथियार और गोलियां खरीदने के साथ साथ अपने खर्चे भी पूरे करते थे । एक – दूसरे गिरोह को कमजोर करने के लिए फाइनेंसरों को भी निशाना बनाते रहे हैं। 

इन दोनों गिरोह को करीब से जानने वालों का कहना है कि कई बार दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश भी की जा चुकी थी, लेकिन दोनों के बीच दुश्मनी अब इतनी बढ़ चुकी थी कि दोनों की मौत से खत्म हो सकती थी। अब तो दोनों ही सरगनाओं की हत्या हो चुकी है पर गैंगवार जारी है। आगे बताएंगे कि कभी दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ने वाले टिल्लू और गोगी कैसे बने दुश्मन और कैसे हुए वो अपराध की दुनिया के मुसाफिर बन गए ….?  

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