1.40 लाख बेटियों को साइकिल मिलेगी, लेकिन क्या इससे दिल्ली की बेटियों की शिक्षा की असली मुश्किलें खत्म होंगी?
दिल्ली सरकार ने अपनी 'विद्या वाहिनी' योजना का विस्तार किया है, जिसके तहत 9वीं कक्षा की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए साइकिलें दी जा रही हैं। अब तक 3,200 से ज़्यादा साइकिलें बांटी जा चुकी हैं और इस साल 1.40 लाख छात्राओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल का मकसद लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना और उनका आत्मविश्वास बढ़ाना है, लेकिन जानकारों का कहना है कि सिर्फ़ साइकिल देने से ही समस्या हल नहीं होगी; इसके साथ-साथ सुरक्षित सड़कें, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफ़िक सुरक्षा और लड़कियों के आने-जाने के लिए सहायक सामाजिक माहौल की भी ज़रूरत है।
1.40 लाख बेटियों को साइकिल मिलेगी, लेकिन क्या इससे दिल्ली की बेटियों की शिक्षा की असली मुश्किलें खत्म होंगी?
दिल्ली में बेटियों की शिक्षा को आसान और महफूज बनाने की राह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को दिल्ली विधानसभा परिसर में कक्षा 9 की 200 छात्राओं को ‘विद्या वाहिनी’ योजना के तहत साइकिल वितरित की गईं। इसके साथ ही योजना के मुताबिक अब तक 3,200 से ज्यादा छात्राओं को साइकिल दी जा चुकी हैं।
सरकार का मकसद अब इस अभियान को बड़े स्तर तक ले जाने पर है। इस साल दिल्ली की करीब 1.40 लाख कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिल देने का मंसूबा रखा गया है। सरकार का कहना है कि स्कूल तक पहुंचने में दूरी या परिवहन की कमी किसी भी बेटी की पढ़ाई के रास्ते में रुकावट नहीं बननी चाहिए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को बेटियों के ख्वाबों से जोड़ते हुए कहा कि हर बेटी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े और अपने ख्वाबों को पूरा करे। उन्होंने कहा कि ‘विद्या वाहिनी’ परिवार अब 3,200 से ज्यादा बेटियों का हो चुका है और सरकार इसे 1.40 लाख बेटियों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।
वहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह पहल केवल साइकिल बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद लड़कियों के लिए शिक्षा को आसान, महफूज और अधिक सुलभ बनाना है। सरकार के मुताबिक परिवहन की सुविधा बेहतर होने से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सहूलियत मिलेगी और उन्हें शिक्षा जारी रखने में मदद मिलेगी।
बड़ी तस्वीर यह है कि दिल्ली सरकार अब बेटियों की शिक्षा में परिवहन को भी एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देख रही है। 1.40 लाख छात्राओं तक इस योजना का विस्तार होने पर राजधानी में बड़ी संख्या में स्कूली छात्राओं को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार ने साफ किया है कि बेटियों की शिक्षा, अवसर और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
लेकिन असली सवाल यहां है:
अगर सड़कें सुरक्षित नहीं हैं, ट्रैफिक ज्यादा है, स्ट्रीट लाइट नहीं है, स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं या परिवार सामाजिक कारणों से लड़कियों को अकेले साइकिल चलाने की अनुमति नहीं देते, तो सिर्फ साइकिल मिलने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। इसलिए इस योजना के साथ सुरक्षित साइकिल रूट, बेहतर सड़कें, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं भी जरूरी हैं।
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