अपराधियों का ठिकाना बने रेस्तरां? 5 साल से फरार ‘307’ का आरोपी वेटर-रिसेप्शनिस्ट बनकर काट रहा था फरारी, क्राइम ब्रांच ने दबोचा
-पड़ोसी के झगड़े में पहुंचा था 'मौत का सामान' लेकर -तकनीकी सर्विलांस और हेड कांस्टेबल की सटीक मुखबिरी से हुआ खुलासा

-मुकेश राणा विशेष संवाददाता ,
दिल्ली | कानून के हाथ लंबे होते हैं—यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (NR-I, प्रशांत विहार) की हालिया कार्रवाई से एक बार फिर साबित हुआ है। 16 दिसंबर 2021 को पश्चिम विहार इलाके में एक शख्स के सिर पर जानलेवा हमला कर लहूलुहान करने और पांच साल (मामले की शुरुआत से कानूनी प्रक्रिया तक) से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा भगोड़ा आरोपी मिथुन विश्वास आखिरकार दबोच लिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिस आरोपी को तीस हजारी कोर्ट ने 7 जून 2022 को भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित किया था, वह कहीं दूर भागने के बजाय दिल्ली के ही पश्चिम विहार क्षेत्र के एक नामी रेस्तरां में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी कर आराम से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था।
पड़ोसी के झगड़े में पहुंचा था 'मौत का सामान' लेकर पूरा मामला पड़ोसी के बीच हुई मामूली कहासुनी से शुरू हुआ था। घटना वाले दिन पीड़िता के साथ राहुल नाम के स्थानीय युवक ने बदसलूकी और मारपीट की थी। जब पीड़ित पक्ष शिकायत लेकर राहुल के चाचा के पास पहुंचा, तो मामले को सुलझाने के बजाय आरोपी राहुल अपने साथियों—मिथुन विश्वास, सन्नी और अन्य—के साथ लाठी-डंडों से लैस होकर आ धमका।
इसी दौरान, मध्य प्रदेश के बैतूल का मूल निवासी और 10वीं पास मिथुन विश्वास ने पीड़ित के सिर पर जानलेवा हमला कर दिया। लहूलुहान हालत में पीड़ित को अस्पताल पहुंचाना पड़ा था, जिसके बाद पश्चिम विहार (ईस्ट) थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 308 (गैर-इरादतन हत्या का प्रयास), 506 (आपराधिक धमकी) और 34 (समान मंशा) के तहत संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया था।
तकनीकी सर्विलांस और हेड कांस्टेबल की सटीक मुखबिरी से हुआ खुलासा घटना के बाद से ही मिथुन पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच के एसीपी अशोक शर्मा के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर पुखराज के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया।
इंटेलिजेंस नेटवर्क: टीम में शामिल हेड कांस्टेबल नरेंद्र कौशिक को गुप्त सूचना मिली कि घोषित भगोड़ा मिथुन इलाका छोड़कर जाने की बजाय आसपास ही वेश बदलकर रह रहा है।
टेक्निकल सर्विलांस: तकनीकी निगरानी की मदद से आरोपी की सटीक लोकेशन ट्रेस की गई।
जाल बिछाकर गिरफ्तारी: 26 अगस्त को क्राइम ब्रांच की टीम ने पश्चिम विहार के डीडीए पार्क के पास घेराबंदी की और आरोपी को धर दबोचा।
आपराधिक रिकॉर्ड: जुआ और मारपीट का पुराना आदी पुलिस जांच में सामने आया है कि मिथुन अत्यधिक शराब पीने का आदी है। वह अपनी पहचान छिपाकर रेस्तरां में रिसेप्शनिस्ट का काम कर रहा था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि आरोपी के खिलाफ पश्चिम विहार और पंजाबी बाग थानों में मारपीट व जुआ अधिनियम (Gambling Act) के तहत दो अन्य आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं।
क्राइम ब्रांच की इस सफलता से न केवल एक खूंखार भगोड़ा सलाखों के पीछे पहुंचा है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा होता है कि कमर्शियल प्रतिष्ठानों (जैसे रेस्तरां या दुकानों) में बिना पुलिस वेरिफिकेशन के काम करने वाले कर्मचारी सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।
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