दिल्ली में 17 लाख झुग्गीवासियों के पुनर्वास की तैयारी, डीडीए ने डेवलपर्स के साथ की बैठक
मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 के तहत झुग्गीवासियों को मौजूदा स्थान पर ही पक्के मकान और नागरिक सुविधाएं देने के लिए निजी क्षेत्र से मांगे गए सुझाव।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राजधानी में बड़े पैमाने पर इन-सिटू स्लम पुनर्वास कार्यक्रम को गति देने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 के विजन को ध्यान में रखते हुए करीब 17 लाख झुग्गीवासियों को उनके मौजूदा स्थान पर ही पक्के मकान और आधुनिक शहरी सुविधाएं मुहैया कराने की योजना बनाई जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी योजना को व्यावहारिक रूप देने के उद्देश्य से डीडीए ने 25 सितंबर को बिल्डरों और डेवलपर्स के साथ एक विशेष इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया। यह बैठक दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधु के निर्देशों और केंद्र सरकार के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप आयोजित की गई थी।
बैठक के दौरान प्राधिकरण ने निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी और सुगम रूपरेखा तैयार करने पर जोर दिया। रियल एस्टेट डेवलपर्स और उद्योग प्रतिनिधियों ने पुनर्वास परियोजनाओं के व्यावहारिक ढांचे, फंडिंग मॉडल, जोखिम प्रबंधन और विभिन्न सरकारी मंजूरियों की प्रक्रियाओं को लेकर अपने सुझाव रखे।
डीडीए के उपाध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में इतने बड़े स्तर पर पुनर्विकास कार्यों को अंजाम देने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद अहम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी क्षेत्र के सहयोग से ही परियोजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, बैठक में डेवलपर्स की ओर से प्राप्त सभी महत्वपूर्ण सुझावों की समीक्षा की जा रही है। इन्हीं सुझावों के आधार पर योजना के अगले चरण की रूपरेखा तय की जाएगी, जिसमें झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों की मूलभूत प्राथमिकताओं और जरूरतों को सर्वोपरि रखा जाएगा।
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