दिल्ली में लैंड पूलिंग को गति देने के लिए डीडीए का जनसंपर्क अभियान शुरू, गांवों में लग रहे विशेष शिविर
उपराज्यपाल के निर्देश पर 'रिफॉर्म उत्सव' के तहत शुरू हुए इस अभियान में किसानों और जमीन मालिकों की चिंताओं को दूर कर रहा है प्राधिकरण।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राजधानी में लैंड पूलिंग नीति को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एक महीने का विशेष जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मास्टर प्लान ऑफ दिल्ली (एमपीडी) 2047 के तहत नियोजित शहरी विस्तार को रफ्तार देना और जमीन मालिकों को नीति के प्रावधानों से अवगत कराना है।
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के निर्देश पर यह अभियान केंद्र सरकार के 'रिफॉर्म उत्सव' के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत संबंधित गांवों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां किसान और अन्य हितधारक डीडीए अधिकारियों से सीधे बातचीत कर परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर अपनी शंकाओं का समाधान कर रहे हैं।
वर्ष 2018 में अधिसूचित लैंड पूलिंग नीति का दायरा लगभग 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इस व्यापक योजना में करीब 12 लाख नए मकानों के निर्माण और 600 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों के विकास की क्षमता मौजूद है, जिससे सुनियोजित आवासीय और सामाजिक ढांचा तैयार किया जा सकेगा।
प्राधिकरण बक्करवाला (जोन के-I), तिगीपुर (जोन पी-II) और सुल्तानपुर डबास (जोन एन) में ऐसे जनसंपर्क कार्यक्रम पहले ही आयोजित कर चुका है। इन बैठकों के दौरान जमीन मालिकों ने योजना में शामिल होने की इच्छा जताई, वहीं अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि सड़क नेटवर्क और संबंधित भूखंडों का विस्तृत ब्योरा जल्द अधिसूचित किया जाएगा।
डीडीए के तय कार्यक्रम के अनुसार, अगले चरण में जोन एल के छावला और सारंगपुर, जोन जे के नेब सराय, जोन पी-I के खेड़ा कलां तथा जोन पी-II के मुखमेलपुर में शिविर लगाए जाएंगे। इस नीति के तहत जमीन मालिक प्राधिकरण और निजी संस्थाओं के साथ साझेदारी में स्वेच्छा से अपनी जमीन विकास के लिए दे सकते हैं।
विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए प्राधिकरण 20-हेक्टेयर की छोटी नियोजन योजनाओं को बढ़ावा दे रहा है, ताकि बड़े भूखंडों के एकत्रीकरण का इंतजार किए बिना चरणबद्ध तरीके से काम शुरू हो सके। इसके तहत बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देते हुए 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ाई वाली सड़कों का निर्माण पहले किया जाएगा।
इसके अलावा अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (यूईआर-II) के किनारे एक हाई-डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है, जिससे किफायती आवास, व्यावसायिक केंद्र, लॉजिस्टिक्स और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। डीडीए के अनुसार, जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन शुरू हो चुका है और गाढ़ी खसरो तथा इब्राहिमपुर गांवों को मिलाकर बना सेक्टर 8बी इस नीति के तहत पहला अधिसूचित सेक्टर बन गया है।
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