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दिल्ली-एनसीआर में किरायेदारों से 'एंट्री और एग्जिट फीस' वसूल रहे आरडब्ल्यूए, जानिए क्या हैं नियम और कहां करें शिकायत

दिल्ली-एनसीआर की कई हाउसिंग सोसायटियों में किरायेदारों से मनमानी एंट्री और एग्जिट फीस वसूलने का मामला सामने आया है, जिस पर कानूनी विशेषज्ञों और अधिकारियों ने नियमों की स्थिति स्पष्ट की है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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21 जुलाई 2026 · 1:19 am2.7 हज़ार व्यूज़
दिल्ली-एनसीआर में किरायेदारों से 'एंट्री और एग्जिट फीस' वसूल रहे आरडब्ल्यूए, जानिए क्या हैं नियम और कहां करें शिकायत
दिल्ली-एनसीआर में किरायेदारों से 'एंट्री और एग्जिट फीस' वसूल रहे आरडब्ल्यूए, जानिए क्या हैं नियम और कहां करें शिकायत — NDTV

दिल्ली-एनसीआर की कई हाउसिंग सोसायटियों में नए किरायेदारों से सामान शिफ्ट करने के नाम पर हजारों रुपये की 'एंट्री फीस' और फ्लैट खाली करते समय 'एग्जिट फीस' वसूलने के मामले सामने आ रहे हैं। मयूर विहार और नोएडा सहित विभिन्न क्षेत्रों के किरायेदारों ने इस मनमानी वसूली पर चिंता जताई है। इस अभ्यास ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) कानूनी रूप से इस तरह का शुल्क वसूल सकते हैं।

सोसायटियों के निवासियों के अनुसार, आरडब्ल्यूए अक्सर 'डेवलपमेंट चार्ज' के नाम पर यह शुल्क वसूलते हैं। सोसायटियों का तर्क होता है कि सामान शिफ्ट करने के दौरान कॉमन एरिया, जैसे दीवारों, गमलों और लाइटिंग को नुकसान पहुंचता है, जिसकी मरम्मत के लिए फंड की जरूरत होती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा कोई भी शुल्क तब तक नहीं लिया जा सकता जब तक कि वह सोसायटी के नियमों (बाय-लॉज) में शामिल न हो या जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में पारित प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित न हुआ हो।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आरडब्ल्यूए एक सेवा प्रदाता के रूप में काम करता है न कि मुनाफा कमाने वाली संस्था के रूप में। विशेषज्ञों का कहना है कि आरडब्ल्यूए मनमाने ढंग से कोई नया शुल्क लागू नहीं कर सकता है और रखरखाव या मरम्मत से जुड़ा हर शुल्क लिखित नियमों पर आधारित होना चाहिए। किरायेदारों और फ्लैट मालिकों को भुगतान करने से पहले आरडब्ल्यूए से संबंधित नियम या प्रस्ताव की प्रति मांगने का पूरा अधिकार है।

उत्तर प्रदेश के फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स विभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार निखिलेश राजन ने स्पष्ट किया है कि किरायेदारों से मनमानी 'एंट्री फीस' वसूलने का कोई विशिष्ट नियम नहीं है। उन्होंने बताया कि बिना किसी कानूनी आधार के इस तरह के भुगतान की मांग करना किरायेदारों का शोषण करने जैसा है। पीड़ित किरायेदार इस संबंध में फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जो आरडब्ल्यूए के पंजीकरण और विनियमन के लिए जिम्मेदार है।

शिकायत मिलने पर विभाग संबंधित आरडब्ल्यूए से स्पष्टीकरण मांग सकता है और आवश्यक होने पर जांच शुरू कर सकता है। डिप्टी रजिस्ट्रार के अनुसार, यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो विभाग आरडब्ल्यूए के कामकाज और वित्तीय स्थिति का ऑडिट करा सकता है। गंभीर मामलों में नियमों के उल्लंघन या अधिकार के दुरुपयोग के लिए सोसायटी का पंजीकरण रद्द करने की सिफारिश भी की जा सकती है।

इसके अलावा, उपभोक्ता अदालतों ने भी कुछ मामलों में हाउसिंग सोसायटियों द्वारा अनधिकृत शुल्क लगाने को अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। कानूनी रूप से, वैध रेंट एग्रीमेंट वाले किरायेदार को सोसायटी में प्रवेश करने या बाहर जाने से रोकना भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गलत तरीके से रोकने (wrongful restraint) का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित किरायेदार पुलिस में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं क्योंकि सोसायटियों को कानूनन ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।

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