सामग्री पर जाएँ
ताज़ा
नोएडा-दिल्ली बस गैंगरेप मामला: जिस स्लीपर बस में हुई वारदात, उस पर पहले से लंबित थे ₹63,000 के 12 चालानमुख्यमंत्री जनसेवा सदन में जनसुनवाई: सीएम रेखा गुप्ता ने सुनीं समस्याएं, तय समय में निस्तारण के निर्देशदिल्ली की मतदाता सूची में ऑटोमेटेड सिस्टम ने पकड़ीं गड़बड़ियां, 19 लाख से अधिक फॉर्म में विसंगतियां चिह्नितनोएडा के हरौला में मोबाइल चोरी के शक में युवक की पीट-पीटकर हत्या, छह लोग पकड़े गएगाजियाबाद में सीबीआई केस रफा-दफा कराने के नाम पर वसूली करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, पूर्व आईबी कर्मी समेत तीन गिरफ्तारमहंगी लागत और चार्जिंग की कमी बनी इलेक्ट्रिक स्कूल बसों की राह में रोड़ा, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

महंगी लागत और चार्जिंग की कमी बनी इलेक्ट्रिक स्कूल बसों की राह में रोड़ा, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

इंडिया क्लीन ट्रांसपोर्टेशन समिट में विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए ई-बसें जरूरी हैं, लेकिन ऊंची लागत और बुनियादी ढांचे की कमी बड़ी बाधा हैं।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
शेयर
3 सितंबर 2026 · 5:49 am54 व्यूज़
महंगी लागत और चार्जिंग की कमी बनी इलेक्ट्रिक स्कूल बसों की राह में रोड़ा, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
महंगी लागत और चार्जिंग की कमी बनी इलेक्ट्रिक स्कूल बसों की राह में रोड़ा, विशेषज्ञों ने जताई चिंताHindustan Times

देश में स्कूली परिवहन को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने से बच्चों को सड़क पर होने वाले हानिकारक उत्सर्जन से बचाया जा सकता है, लेकिन इस राह में ऊंची लागत, चार्जिंग सुविधाओं की कमी और वित्तीय बाधाएं सबसे बड़ा अवरोध बनी हुई हैं। नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया क्लीन ट्रांसपोर्टेशन समिट (आईसीटीएस) 2026' के दौरान उद्योग जगत और नीति विशेषज्ञों ने यह चिंता जाहिर की। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विशेष रूप से स्कूल बसों के अनुकूल मॉडल और आसान वित्तीय विकल्प उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक इसका बड़े पैमाने पर विस्तार मुश्किल है।

बस एंड कार ऑपरेटर्स कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीओसीआई) के संयुक्त सचिव गुरमीत सिंह तनेजा ने सम्मेलन में कहा कि स्कूली परिवहन मूल रूप से एक सामाजिक सेवा है, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था को इलेक्ट्रिक में बदलने से पर्यावरण को लाभ जरूर होगा, लेकिन भारी लागत अब भी सबसे बड़ी अड़चन है। इसके साथ ही चार्जिंग में लगने वाला समय, वर्कशॉप की सीमित सुविधाएं और मोटर वाहन नियमों में जरूरी बदलाव न होना भी बड़े मुद्दे हैं।

पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस के मुख्य परिचालन अधिकारी सीके गोयल ने बताया कि उत्पादन क्षमता तो मौजूद है, लेकिन स्कूल अतिरिक्त प्रीमियम चुकाने से कतराते हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार के उस प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसके तहत निजी बसों को सरकारी चार्जिंग स्टेशनों और रियायती बिजली के इस्तेमाल की अनुमति देने की बात कही गई है। गोयल के अनुसार, डीटीसी डिपो में मामूली शुल्क देकर बसें सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद दिन के समय चार्ज हो सकती हैं और दोपहर की छुट्टी से पहले वापस पहुंच सकती हैं।

स्विच मोबिलिटी के योजना एवं रणनीति प्रमुख विनोद कुमार आर ने आगाह किया कि सामान्य इलेक्ट्रिक बसों को स्कूली उपयोग में लाने से बड़ी बैटरी का अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। वहीं, विश्व बैंक के वरिष्ठ परिवहन विशेषज्ञ डॉ. लघु पाराशर ने कहा कि स्कूल बसें रोजाना औसतन सिर्फ 50 से 60 किलोमीटर चलती हैं और दिन में काफी समय खड़ी रहती हैं, जिससे इनके विद्युतीकरण की संभावनाएं बेहतर हैं। इसके अलावा कई स्कूलों के पास अपने परिसर में चार्जिंग ढांचा लगाने के लिए पर्याप्त जमीन भी उपलब्ध होती है।

डॉ. पाराशर ने सुझाव दिया कि निजी ऑपरेटरों के लिए लंबे समय के ऋण, कम डाउन पेमेंट और लीजिंग मॉडल तैयार किए जाने चाहिए ताकि मासिक नकदी प्रवाह पर असर न पड़े। गौरतलब है कि दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति 2026 के तहत स्कूलों के लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके तहत नीति लागू होने के दो साल के भीतर कुल स्कूल बस बेड़े का 10 प्रतिशत, तीन साल में 20 प्रतिशत और 31 मार्च 2030 तक 30 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक करना अनिवार्य किया गया है।

इनसे संबंधितdelhi-ncrElectric BusesSchool TransportEV PolicyDelhi News
शेयर

लेखक

टिप्पणियाँ

0

चर्चा में शामिल होने के लिए साइन इन करें। टिप्पणियाँ शिष्टता के लिए संचालित होती हैं।

आगे पढ़ें

संबंधित कवरेज

दिल्ली: ₹100 करोड़ की चैरिटेबल ज़मीन हड़पने का आरोप, वसीयत में जालसाजी के मामले में EOW ने दर्ज की FIR2 हज़ार

दिल्ली: ₹100 करोड़ की चैरिटेबल ज़मीन हड़पने का आरोप, वसीयत में जालसाजी के मामले में EOW ने दर्ज की FIR

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गुलाबी बाग स्थित 'नज़र कंवर सुराणा चैरिटेबल ट्रस्ट' की लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की 2,000 वर्ग गज चैरिटेबल ज़मीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और वसीयत में हेरफेर कर निजी संपत्ति में बदलने के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

दिल्ली में 'सेवा पखवाड़ा' के दौरान कई विकास परियोजनाओं का होगा उद्घाटन, बारापुला फेज-3 भी सूची में शामिल3 हज़ार

दिल्ली में 'सेवा पखवाड़ा' के दौरान कई विकास परियोजनाओं का होगा उद्घाटन, बारापुला फेज-3 भी सूची में शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और शासन में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक राजधानी में कई बड़े प्रोजेक्ट्स जनता को समर्पित किए जाएंगे।

जसोला में खुले नाले में गिरा 15 वर्षीय छात्र, मुख्यमंत्री के निर्देश पर एमसीडी का जूनियर इंजीनियर निलंबित1 हज़ार

जसोला में खुले नाले में गिरा 15 वर्षीय छात्र, मुख्यमंत्री के निर्देश पर एमसीडी का जूनियर इंजीनियर निलंबित

जसोला गांव में पतंग पकड़ने के दौरान नाले में गिरे किशोर की तलाश जारी, लापरवाही बरतने पर निगम अधिकारी के खिलाफ हुई कार्रवाई।