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ग्रेटर नोएडा: प्राधिकरण और प्रशासन से वार्ता के बाद किसानों का धरना एक महीने के लिए स्थगित

ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ सकारात्मक बातचीत और आश्वासनों के बाद किसान संगठनों ने अपना आंदोलन टाल दिया है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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18 सितंबर 2026 · 6:12 am356 व्यूज़
ग्रेटर नोएडा: प्राधिकरण और प्रशासन से वार्ता के बाद किसानों का धरना एक महीने के लिए स्थगित
ग्रेटर नोएडा: प्राधिकरण और प्रशासन से वार्ता के बाद किसानों का धरना एक महीने के लिए स्थगित — Jagran

ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण कार्यालयों पर जारी किसानों के धरने को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया गया है। भारतीय किसान यूनियन और किसान संघर्ष मोर्चा ने प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और जिला प्रशासन के साथ हुई बैठकों के बाद यह निर्णय लिया। वार्ता के दौरान विभिन्न लंबित मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर से कार्रवाई का भरोसा दिया गया।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने प्राधिकरण अधिकारियों के साथ चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से प्रभावित किसानों को चार प्रतिशत आबादी भूखंड देने का मामला फिलहाल शासन में विचाराधीन है। वहीं विस्थापन नीति में आवश्यक बदलाव को लेकर जिला प्रशासन स्तर पर भी शीघ्र निर्णय होने की बात कही गई है।

आबादी लीजबैक के विवादों को सुलझाने के लिए एसीईओ की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति तीन-तीन गांवों को शामिल करते हुए मौके पर जाकर प्रकरणों की भौतिक जांच करेगी और नियमों के तहत निर्णय लेगी। किसानों को इस प्रक्रिया में अपने दस्तावेज और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका भी मिलेगा।

यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों को लेकर भी कई बिंदुओं पर सहमति बनी। अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे प्रभावितों को सात प्रतिशत विकसित भूखंड देने के मुद्दे पर जल्द बातचीत का भरोसा दिया। इसके अलावा जिन किसानों का 64.7 प्रतिशत मुआवजा अभी तक बकाया है, उन्हें जल्द भुगतान करने और जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित युवाओं के रोजगार की स्थिति की जानकारी देने का आश्वासन भी दिया गया।

किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने भी प्राधिकरण सीईओ, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर के साथ बैठक की। इस दौरान 10 प्रतिशत आबादी भूखंड के लंबित प्रकरण को लेकर 5 अक्टूबर तक लखनऊ में मुख्य सचिव और औद्योगिक विकास आयुक्त के साथ बैठक कराने का आश्वासन मिला। किसान नेताओं ने बताया कि इस संबंध में प्राधिकरण बोर्ड से पहले ही प्रस्ताव पारित होकर शासन को भेजा जा चुका है।

किसान एकता संघ के अध्यक्ष सोरन प्रधान और अन्य किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि आबादी और भूमिहीनों की दुकानों के आवंटन जैसे मामलों पर 15 अक्टूबर तक ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया गया है। किसान प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर वादों पर अमल नहीं हुआ, तो संगठन 6 अक्टूबर से दोबारा दिन-रात का धरना शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।

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