बजट बढ़ने के बाद ग्रेटर नोएडा सेफ सिटी परियोजना पर अब खर्च होंगे 250 करोड़ रुपये, ड्रोन से भी होगी निगरानी
आईआईटी रुड़की के पुनर्मूल्यांकन और तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद इस सुरक्षा परियोजना की अनुमानित लागत में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट को सुरक्षित बनाने के लिए तैयार की जा रही 'सेफ सिटी' और 'समेकित यातायात प्रबंधन प्रणाली' (आईटीएमएस) परियोजना की लागत बढ़ गई है। पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का बजट करीब 227 करोड़ रुपये तय किया गया था, जो अब बढ़कर लगभग 250 करोड़ रुपये हो गया है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से पहले ही इसमें करीब 10 प्रतिशत की बजटीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के बजट में यह वृद्धि आईआईटी रुड़की के सर्वे और पुनर्मूल्यांकन के बाद की गई है। दरअसल, करीब दो साल पहले तैयार की गई रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) में सीसीटीवी कैमरे, वायर और चिप सर्किट सहित 1000 से अधिक उपकरणों की दरें पुरानी थीं। परियोजना में हुई देरी के कारण कोई भी कार्यदायी एजेंसी पुरानी दरों पर काम करने के लिए तैयार नहीं हो रही थी।
बजट कम होने की वजह से पिछली निविदा में अधिक बोली लगाने वाली कंपनी ने भी काम करने से हाथ पीछे खींच लिए थे। इसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आईआईटी रुड़की से इस परियोजना की लागत और तकनीक का पुनर्मूल्यांकन कराया। संस्थान ने तकनीकी अपग्रेडेशन के साथ बजट में संशोधन की सिफारिश की है, जिसके तहत अब उच्च गुणवत्ता वाले आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे।
इस परियोजना के अंतर्गत ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट की करीब 350 चुनिंदा लोकेशंस पर 2700 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की मदद से न केवल यातायात का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा, बल्कि पुलिस को अपराध नियंत्रण में भी बड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा, शहर में होने वाले धरना-प्रदर्शनों और ट्रैफिक जाम की स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
परियोजना के तहत शहर के महत्वपूर्ण चौराहों और क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें परी चौक, एलजी चौक, अमृतपुरम, जगत फार्म, सूरजपुर, कासना और नॉलेज पार्क शामिल हैं। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चार मूर्ति चौक, एक मूर्ति चौक, बिसरख और डीमार्ट रोटरी पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी, जिसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में एक एकीकृत कंट्रोल रूम बनाया जाएगा।
परियोजना को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए प्राधिकरण स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद जुलाई के अंत तक नई आरएफपी वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। इसके बाद निविदा प्रक्रिया के जरिए इस काम के लिए एक अनुभवी और योग्य कंपनी का चयन किया जाएगा।
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