कांवड़ यात्रा: दिल्ली में देर रात बजते डीजे और ट्रैफिक जाम से निवासी परेशान, 11 अगस्त तक प्रभावित रहेंगे कई मार्ग
राजधानी के विभिन्न हिस्सों में कांवड़ यात्रा के प्रवेश के साथ ही शोर और यातायात की समस्याएं सामने आने लगी हैं, जिस पर पुलिस और आरडब्ल्यूए आमने-सामने हैं।

दिल्ली दर्पण ब्यूरो रिपोर्ट :-
वार्षिक कांवड़ यात्रा की शुरुआत के साथ ही दिल्ली की सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ने लगा है और देर रात तक बजते तेज लाउडस्पीकर निवासियों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आगामी 11 अगस्त तक शहर के कई प्रमुख मार्गों पर भारी जाम की संभावना जताते हुए चेतावनी जारी की है। इस बीच, विभिन्न इलाकों के निवासियों ने नियमों के उल्लंघन और पुलिस कार्रवाई की कमी पर चिंता व्यक्त की है।
कांवड़ियों के जत्थे मुख्य रूप से गाजियाबाद और नोएडा सीमाओं से दिल्ली में प्रवेश कर रहे हैं। ये जुलूस दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे-9, मथुरा रोड, आउटर रिंग रोड, अरबिंदो मार्ग और महरौली-गुरुग्राम रोड जैसे व्यस्त मार्गों से होकर गुजर रहे हैं। इसके अतिरिक्त मुंडका, टिकरी बॉर्डर और नजफगढ़ मार्ग की ओर से आने वाले जत्थों के कारण जनकपुरी, द्वारका और नजफगढ़ के आसपास भी ट्रैफिक की समस्या पैदा हो रही है।
इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित दक्षिण, दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी दिल्ली के इलाके हैं। मथुरा रोड और रिंग रोड के समीप स्थित ग्रेटर कैलाश, सीआर पार्क, कालकाजी, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नेहरू प्लेस और लाजपत नगर जैसे क्षेत्रों के निवासी देर रात तक बजते संगीत से परेशान हैं। 30 जुलाई से शुरू हुई इस यात्रा के बाद निवासियों का कहना है कि सावन के पहले सोमवार के बाद वाहनों की संख्या और व्यवधान दोनों बढ़ने की आशंका है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर का उपयोग प्रतिबंधित है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार रिहायशी इलाकों में ध्वनि का स्तर दिन के समय 55 डेसिबल और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच 45 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। हालांकि, सड़कों से गुजर रहे कई कांवड़ वाहन इन मानकों का खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं।
फ्रेंड्स कॉलोनी ईस्ट आरडब्ल्यूए की सचिव त्रिवेणी महाजन ने बताया कि मथुरा रोड के किनारे रहने वाले लोग तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम से काफी परेशान हैं। वहीं, यूनाइटेड रेजिडेंट्स जॉइंट एक्शन (ऊर्जा) के अध्यक्ष अतुल गोयल ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन का ध्यान नियमों का पालन कराने के बजाय केवल जुलूस को निकालने पर रहता है।
दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले पर अभी तक कोई औपचारिक प्राथमिकी या शिकायत दर्ज नहीं हुई है। दक्षिण-पूर्व जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, पिछले दो दिनों में कई गाड़ियों को रोककर चालकों को आवाज कम करने या साउंड सिस्टम के तार काटने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का दावा है कि रात में गश्त बढ़ा दी गई है और आरडब्ल्यूए के संपर्क में रहकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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