चलती गाड़ी में कॉल सेंटर चलाकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दिल्ली पुलिस ने तीन को दबोचा
लोकेशन ट्रेसिंग से बचने के लिए एसयूवी से गिरोह संचालित कर रहे थे आरोपी, पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और बैंक सामग्री बरामद की।

दिल्ली पुलिस ने लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए चलती एसयूवी कार में कॉल सेंटर संचालित करने वाले एक साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी लोकेश तोमर, हिमांशु राठौर और तुषार के रूप में हुई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले नीलेश विश्वकर्मा की शिकायत के बाद हुआ। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि बीमा पॉलिसियों में निवेश किए गए 45 लाख रुपये वापस दिलाने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस के बहाने उनसे 65,000 रुपये की ठगी की गई थी। इस संबंध में पूर्वी दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
जांच के दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर संदिग्ध लेन-देन पाए जाने के बाद राठौर से जुड़ा एक बैंक खाता जांच के दायरे में आया। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और निगरानी के आधार पर पहले राठौर को हिरासत में लिया। इसके बाद पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिली।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए एसयूवी कार को अपना मोबाइल बेस बनाकर लगातार अपनी लोकेशन बदलते रहते थे। पुलिस टीम ने पूर्वी दिल्ली के ओल्ड कोंडली इलाके में इस संदिग्ध वाहन को रोका और बाकी दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में तीनों आरोपियों की भूमिकाएं बंटी हुई थीं। तुषार खुद को अधिकारी या प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करता था और झांसा देकर ओटीपी व बैंकिंग विवरण हासिल करता था। वहीं लोकेश तोमर इस पूरे ऑपरेशन का तालमेल बैठाता था और ठगी की रकम घुमाने के लिए म्यूल बैंक खातों का इंतजाम करता था, जबकि राठौर कमीशन के बदले बैंक खाते मुहैया कराता था।
तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट और मेट्रो कार्ड, छह चेक बुक, तीन पासबुक और एक हस्ताक्षरित चेक बरामद किया गया है। इसके अलावा पुलिस ने पांच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड, दो रेंट एग्रीमेंट, 11 पासपोर्ट साइज तस्वीरें, ग्राहकों की नौ पन्नों की सूची और एक संदिग्ध फर्जी एनपीसीआई स्टैंप भी जब्त किया है।
पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या ये बैंक खाते फर्जी पतों के आधार पर खोले गए थे। इसके साथ ही आरोपी लोकेश तोमर के मुंबई और तेलंगाना के साइबर अपराध मामलों से संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है।
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