मुजफ्फरनगर: सहारनपुर मस्जिद मामले पर बोले मौलाना जुल्फिकार, कहा- हाईकोर्ट जाने का मिलना चाहिए था मौका
मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना मुफ्ती जुल्फिकार अली ने धार्मिक स्थलों के मामलों में जल्दबाजी के बजाय कानूनी प्रक्रिया और अदालती फैसलों के सम्मान की अपील की।
सहारनपुर में मस्जिद से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर मुजफ्फरनगर में मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना मुफ्ती जुल्फिकार अली ने गहरी चिंता और अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी पक्ष द्वारा जल्दबाजी या हड़बड़ी में कदम उठाने के बजाय संबंधित पक्ष को उच्च न्यायालय जाने का समुचित अवसर मिलना चाहिए था।
रविवार दोपहर मीडिया से बातचीत करते हुए मौलाना जुल्फिकार अली ने कहा कि इबादतगाहों और धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किया जाना बेहद आवश्यक है। उनका मानना है कि न्यायिक संस्थाओं और उच्च न्यायालय के माध्यम से ही किसी विवाद का सही व न्यायसंगत समाधान संभव है।
धर्मगुरु ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े दस्तावेज और अभिलेख जमींदारी व्यवस्था के समय से लेकर अदालतों तथा विभिन्न सरकारी दफ्तरों में मौजूद रहते हैं। उन्होंने मांग की कि किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्रवाई करने से पूर्व इन पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्डों और कानूनी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
मौलाना ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश का कानून सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। ऐसे में संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण और न्यायिक संस्थाओं के आदेशों का सम्मान होना जरूरी है। उन्होंने आगाह किया कि जल्दबाजी में उठाए गए कदम विवाद को सुलझाने के बजाय और अधिक जटिल बना देते हैं।
सोशल मीडिया के दौर में फैलने वाले भ्रामक प्रचार पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने शहरवासियों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी अपुष्ट खबर पर प्रतिक्रिया देने के बजाय नागरिकों को सीधे जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मौलाना मुफ्ती जुल्फिकार अली ने सभी नागरिकों से शहर में आपसी भाईचारा और अमन-चैन बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी सूरत में सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित नहीं होना चाहिए और शांति व्यवस्था कायम रखना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है।
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