नोएडा-दिल्ली बस गैंगरेप मामला: जिस स्लीपर बस में हुई वारदात, उस पर पहले से लंबित थे ₹63,000 के 12 चालान
नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में इस्तेमाल की गई स्लीपर बस परमिट और गति सीमा उल्लंघन के बावजूद बेरोकटोक सड़कों पर दौड़ रही थी।

ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच चलती स्लीपर बस में 17 वर्षीय किशोरी से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में नया खुलासा हुआ है। वारदात के समय संबंधित बस पर यातायात और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कुल 12 चालान लंबित थे, जिनकी कुल राशि 63,000 रुपये थी। यह वाहन बिना परमिट और बार-बार गति सीमा का उल्लंघन करने के बावजूद लगातार संचालित हो रहा था।
चालान रिकॉर्ड के विवरण के अनुसार, 'यूपी 83 ईटी 3789' नंबर वाली इस बस पर 26,000 रुपये का एक बड़ा चालान मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत काटा गया था। यह जुर्माना बिना वैध परमिट, मार्ग की शर्तों के उल्लंघन, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप और स्पीड-लिमिट डिवाइस संबंधी नियमों की अनदेखी के चलते लगाया गया था। इसके अलावा 4,000 रुपये के नौ चालान निर्धारित गति सीमा पार करने को लेकर जारी किए गए थे, जबकि दो अन्य चालान अवैध पार्किंग और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े थे। ये सभी चालान 11 मई से 23 जुलाई के बीच काटे गए थे।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि स्लीपर बस की बर्थ के चारों ओर पर्दे लगे हुए थे, जिसके कारण बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं देती थीं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी इसे केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना है। इसके साथ ही, वारदात के समय बस के भीतर लगा सीसीटीवी कैमरा भी बंद पाया गया था।
इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच समन्वय पर भी सवाल उठे हैं। ग्रेटर नोएडा के पुलिस उपायुक्त रवि शंकर निम ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने इस घटना के संबंध में गौतमबुद्ध नगर पुलिस से कोई संपर्क नहीं किया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस शून्य प्राथमिकी दर्ज कर मामले को यूपी पुलिस को स्थानांतरित कर सकती थी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की उपायुक्त (उत्तर) नीहारिका भट्ट ने कहा कि कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकार क्षेत्र के मुद्दों को किनारे रखकर तुरंत कार्रवाई की, पीड़िता की मेडिकल जांच कराई और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बस की पहचान कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस घटना के बाद परिवहन सुरक्षा और निगरानी तंत्र पर व्यापक बहस छिड़ गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र याचिका भेजकर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और दोनों राज्यों की सरकारों से स्थिति रिपोर्ट मांगने का अनुरोध किया है। वहीं पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने ड्राइवरों और कंडक्टरों के अनिवार्य पुलिस सत्यापन और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दूसरी तरफ, गिरफ्तार बस चालक कुलदीप की पत्नी ने अपने पति को निर्दोष बताते हुए उन पर लगे आरोपों को गलत बताया है।
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