गुरुग्राम के चिंतल्स पैराडिसो के असुरक्षित फ्लैट 1 जनवरी 2027 तक खाली करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुग्राम के सेक्टर 109 स्थित आवासीय परियोजना के पुनर्निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुए सभी शेष निवासियों को तय समयसीमा में फ्लैट सौंपने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के सेक्टर 109 स्थित चिंतल्स पैराडिसो सोसाइटी के असुरक्षित फ्लैटों में रह रहे निवासियों को 1 जनवरी 2027 तक अपने आवास खाली करने का निर्देश दिया है। अदालत के इस फैसले से आवासीय परिसर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में फ्लैट खाली करने के लिए किसी भी तरह की अतिरिक्त समय सीमा नहीं दी जाएगी।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह आदेश फ्लैट खरीदारों और डेवलपर चिंतल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (सीआईपीएल) के बीच हुए समझौते की शर्तों को स्वीकार किए जाने के बाद दिया। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) के ऑडिट में इस आवासीय परियोजना के सभी ढांचों को रहने के लिए अयोग्य पाया गया था। अदालत ने कहा कि पुनर्विकास से जुड़ी किसी भी शिकायत या विवाद की सुनवाई केवल सुप्रीम कोर्ट में ही होगी और कोई अन्य अदालत इस पर रोक नहीं लगा सकेगी।
उल्लेखनीय है कि 10 फरवरी 2022 को टावर डी का एक हिस्सा ढह जाने से दो निवासियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद निवासियों ने ऑडिट और पुनर्वास की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कुल 9 टावरों और 532 फ्लैटों वाली इस परियोजना के फेज-1 के टावर डी, ई, एफ, जी और एच को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है। फेज-2 के टावर ए, बी, सी और जे में कुछ फ्लैटों में लोग रह रहे थे, जिनमें से करीब 90 निवासियों के फ्लैट खाली न करने के कारण पुनर्विकास का काम अटका हुआ था।
परियोजना के 532 फ्लैट मालिकों में से 196 ने सीआईपीएल के बाय-बैक विकल्प को चुना था, जिसके तहत 6,500 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से स्टांप ड्यूटी, शिफ्टिंग चार्ज और अंतिम भुगतान तक किराया देने का प्रावधान था। वहीं 164 आवंटियों ने पुनर्विकास का विकल्प चुना, जबकि 172 ने कोई विकल्प नहीं चुना था। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी फ्लैट खरीदार अभी भी बाय-बैक विकल्प का चयन कर सकता है।
सीआईपीएल और पुनर्विकास भागीदार सोभा लिमिटेड के अनुसार, फ्लैट खाली होने की तिथि से चार साल के भीतर और सभी आवश्यक स्वीकृतियों के अधीन निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। अदालत ने सीआईपीएल को 31 जनवरी 2027 से नए फ्लैट मिलने तक पात्र आवंटियों को वैकल्पिक आवास का निश्चित किराया देने का निर्देश दिया है। किराए के सुरक्षित भुगतान के लिए डेवलपर को एक एस्क्रो खाते में पांच करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि जमा करनी होगी।
समझौते के अनुसार टावर ए, बी, सी और जे के प्रत्येक गृहस्वामी को स्थानांतरण के लिए 40,000 रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी। इसके अलावा फेज-2 के फ्लैट मालिक पुनर्विकास के लिए प्रति वर्ग फुट 1,000 रुपये का अंशदान करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं। पीठ ने निर्देश दिया कि मौजूदा फ्लैट मालिकों पर कोई अतिरिक्त या गुप्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा और समझौता कराने में राज्य सरकार के सहयोग की भी सराहना की।
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