दिल्ली गोल्फ़ क्लब में धरोहरों पर चूना पोतने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आगा ख़ान ट्रस्ट को दी चेतावनी
उच्चतम न्यायालय ने राजधानी में ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण में लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए केंद्र और संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है।

दिल्ली गोल्फ़ क्लब परिसर में स्थित ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण कार्य में हुई लापरवाही को लेकर उच्चतम न्यायालय ने आगा ख़ान ट्रस्ट और क्लब प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्मारकों की मूल नक्काशी और शिलालेखों को चूने के प्लास्टर से ढकने पर नाराज़गी जताई। अदालत ने ज़िम्मेदार लोगों को जेल भेजने और ट्रस्ट को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी देते हुए दिल्ली गोल्फ़ क्लब से दो सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा है।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सुंदर नर्सरी में निजी ट्रस्ट को व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने पर केंद्र सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि सरकार ने लगभग 80 एकड़ में फैले पार्क की 70 एकड़ ज़मीन आगा ख़ान ट्रस्ट को सौंप दी, जहां वे रेस्तरां चलाकर कमाई कर रहे हैं। केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इस संबंध में आवश्यक निर्देश लेने की बात कही है।
अदालत को बताया गया कि क्लब परिसर के भीतर केंद्रीय संरक्षित स्मारक 'लाल बंगला 1 और 2' स्थित हैं, जिनके आसपास 100 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र को अदालत के आदेश पर खाली करा दिया गया है। इसके अलावा गोल्फ़ क्लब परिसर में 10 अन्य प्राचीन संरचनाएं भी मौजूद हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के नेतृत्व वाले कोर्ट कमिश्नरों के दल ने अपनी रिपोर्ट में इन ऐतिहासिक स्थलों तक भविष्य में आम जनता की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाने की आवश्यकता बताई है।
अदालत ने डिफेंस कॉलोनी में स्थित ऐतिहासिक 'गुमटी ऑफ शेख अली' की स्थिति पर भी संज्ञान लिया। कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्मारक के आसपास निर्माण सामग्री का मलबा बिखरा पाया गया और दिल्ली सरकार की योजना के बावजूद हरित क्षेत्र विकसित नहीं किया गया। पीठ ने दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों, नगर निगम (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) को अपने क्षेत्रों में धरोहरों की निगरानी के ठोस उपाय पेश करने का अंतिम अवसर दिया है।
यह पूरी सुनवाई दिल्ली निवासी राजीव सूरी द्वारा राजधानी की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार को लेकर दायर याचिका पर की जा रही है। याचिका में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) की वर्ष 2021 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया था, जिसमें दिल्ली के 1,100 अधिसूचित विरासत स्थलों का ब्योरा शामिल है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
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टिप्पणियाँ
3क्षेत्रीय असर पर थोड़ा और होता तो अच्छा था, पर कुल मिलाकर मज़बूत लेख।
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