सोनीपत: मंडोरा के संजय हत्याकांड में मुख्य साजिशकर्ता समेत तीन को उम्रकैद, छह आरोपी बरी
सोनीपत की सेशन कोर्ट ने करीब छह साल पुराने हत्याकांड में 53 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों पर जुर्माना भी लगाया।

सोनीपत की एक सत्र अदालत ने गांव मंडोरा में हुए संजय हत्याकांड में मुख्य साजिशकर्ता रोमिल समेत तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. नरिंदर कौर की अदालत ने रोमिल, मयंक और आशीष उर्फ आशि को हत्या तथा आपराधिक साजिश रचने का दोषी पाया। वहीं, मामले में नामजद छह अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
यह मामला 5 जून 2020 का है, जब मंडोरा बस स्टैंड के पास परचून की दुकान चलाने वाले संजय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस ने जांच करते हुए कई आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अदालत ने करीब छह साल तक चले मुकदमे के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर 53 पन्नों का फैसला सुनाया।
अदालत ने रोमिल, मयंक और आशीष को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 20-20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी। इसके साथ ही घातक हथियारों से लैस होकर बलवा करने के आरोप में धारा 148 के तहत तीनों को दो-दो साल के कठोर कारावास और जुर्माने का भी आदेश दिया गया। अदालत के निर्देशानुसार ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
मुख्य साजिशकर्ता रोमिल को फर्जी स्कूटी नंबर प्लेट के इस्तेमाल से जुड़े आरोप में धारा 420 के तहत सात साल की अतिरिक्त कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, एक अन्य आरोपी नरेश उर्फ इशू को अवैध पिस्तौल रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल की जेल और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई, हालांकि उसे हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया गया।
मुकदमे के दौरान मृतक संजय की पत्नी इंदु की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने अदालत में रोमिल, आशीष और मयंक की पहचान करते हुए उन पर हत्या का आरोप लगाया था। अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को साबित करने के लिए कुल 39 गवाहों के बयान और एफएसएल रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए थे।
बचाव पक्ष की ओर से पेश तीन गवाहों ने दावा किया था कि मृतक की पत्नी घटनास्थल पर मौजूद नहीं थी, लेकिन अदालत ने इन दावों को अविश्वसनीय मानते हुए खारिज कर दिया। दूसरी ओर, विक्रम उर्फ विक्की, प्रीतम, परवीन, रोहित उर्फ ढीला, मंजीत और अंकित के खिलाफ पर्याप्त प्रत्यक्ष या वैज्ञानिक साक्ष्य न होने के कारण अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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