सोनीपत में दिल्ली के कारोबारी से लूट के चार दोषियों को 10-10 साल की कैद
सोनीपत की अतिरिक्त सत्र अदालत ने जुराब फैक्ट्री मालिक पर जानलेवा हमला कर नकदी और कागजात लूटने वाले चार दोषियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई।

सोनीपत की एक अदालत ने दिल्ली के कारोबारी पर हमला कर लूटपाट करने के मामले में चार आरोपियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरताज बसवाना की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने मनोज, संदीप उर्फ सीपा, दीपक और राहुल को घातक हथियारों के बल पर लूटपाट करने के आरोप में दोषी ठहराया था।
अदालत ने चारों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि अदा न करने पर दोषियों को छह महीने की अतिरिक्त कठोर कैद भुगतनी होगी। इसके अलावा कोर्ट ने आदेश दिया कि दोषियों से वसूले गए कुल एक लाख रुपये के जुर्माने में से 50 हजार रुपये की राशि पीड़ित व्यवसायी विनोद कुमार जिंदल को बतौर मुआवजा दी जाएगी।
यह मामला 25 जून 2018 का है, जब दिल्ली के पीतमपुरा निवासी विनोद जिंदल के बयान पर सोनीपत के मुरथल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, पीड़ित दोपहर के वक्त अपनी कार से पिपली खेड़ा-राम नगर रोड स्थित अपनी जुराब बनाने की फैक्ट्री पहुंचे थे। उसी समय वैगन-आर कार में सवार हमलावरों ने फैक्ट्री के गेट पर उन पर हमला कर दिया।
हमलावरों ने लोहे की रॉड और दाव से कार के शीशे तोड़े, पीड़ित के साथ मारपीट की और बैग छीनकर फरार हो गए। छीने गए बैग में नकदी, पिपली खेड़ा स्थित 27 कनाल जमीन के मूल दस्तावेज और 15 लाख रुपये की रसीद थी। पुलिस ने जांच के बाद गुमड़ गांव निवासी मनोज, दीपक, राहुल और पांची निवासी संदीप को गिरफ्तार किया था।
सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने आरोपियों के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए अधिकतम सजा की मांग की थी। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इनमें से तीन आरोपियों पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकीलों ने दोषियों के परिवार की आर्थिक स्थिति और छोटे बच्चों व बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का हवाला देकर नरमी बरतने की गुहार लगाई थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि दोषियों ने दिनदहाड़े बेखौफ होकर घातक हथियारों से लूट की वारदात को अंजाम दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी दर्ज किया कि पीड़ित को कोई जानलेवा चोट नहीं आई थी और अभियोजन किसी पुराने मामले में दोषसिद्धि का प्रमाण नहीं दे सका। अदालत ने कानूनी प्रावधानों के तहत जेल में बिताई गई अवधि को मुख्य सजा में समायोजित करने का निर्देश देते हुए दोषियों को जेल भेज दिया।
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