क्राइम ब्रांच का मानवीय चेहरा: सिर्फ अपराधियों में खौफ ही नहीं, बिछड़ों को अपनों से मिलाने में भी मिसाल पेश कर रही दिल्ली पुलिस
-17 साल के दिव्यांग बच्चे की 4 साल बाद हुयी परिवार में वापसी , छलक उठे ख़ुशी का आंसू -1 साल से लापता विक्षिप्त युवक की शिनाख्त, परिवार को सौंपीं अस्थियां

-राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण
दिल्ली। आम जनता के मन में अक्सर यह धारणा होती है कि पुलिस की क्राइम ब्रांच का काम सिर्फ दुर्दांत अपराधियों, कुख्यात गैंगस्टरों को पकड़ना और बड़े संगीन अपराधों की तफ्तीश करना है। लेकिन दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस सोच से इतर अपना एक ऐसा मानवीय चेहरा पेश किया है, जो न सिर्फ सराहनीय है बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल भी है। क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने यह साबित कर दिया है कि खाकी वर्दी के पीछे न केवल कठोर कानून-व्यवस्था का तंत्र है, बल्कि एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है जो बिछड़े हुए परिवारों को मिलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
हाल ही में सामने आई दो घटनाएं दिल्ली पुलिस की उत्कृष्ट कार्यकुशलता के साथ-साथ उसकी गहरी मानवीय संवेदनाओं का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं:
4 साल से बिछड़े 17 वर्षीय दिव्यांग बच्चे को परिवार से मिलाया
तिमारपुर इलाके से 24 अगस्त 2022 को लापता हुआ 17 साल का दिव्यांग बालक बीते 4 सालों से अपने परिवार से दूर था। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने इस बच्चे की बरामदगी पर ₹20,000 के इनाम की घोषणा की थी।
AHTU के इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और ASI अजय कुमार झा की टीम ने एसीपी सुरेश कुमार के मार्गदर्शन में दिन-रात एक कर दिया। देश भर के एनजीओ, चाइल्ड केयर होम और पुलिस व्हाट्सएप ग्रुप्स में डेटा खंगालने के बाद टीम को पूंठ कलां (पंजाब खोड़) स्थित 'अपना घर आश्रम' में बालक की मौजूदगी का सुराग मिला। 19 अगस्त 2026 को जब 4 साल बाद मां-बाप ने अपने जिगर के टुकड़े को सीने से लगाया, तो पूरे परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
1 साल से लापता विक्षिप्त मृतक युवक की शिनाख्त कर परिवार को सौंपीं अस्थियां
दूसरा मामला अमन विहार से अगस्त 2025 से लापता 38 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक का है। अप्रैल 2026 में नांगलोई पुलिस द्वारा असहाय हालत में रेस्क्यू कर 'अपना घर आश्रम' में भर्ती कराए गए इस युवक का 18 अगस्त 2026 को बीमारी के कारण निधन हो गया था।
आश्रम के नियमानुसार अस्थियों का लावारिस समझकर विसर्जन होना तय था, लेकिन AHTU की टीम ने युवक के निधन के बाद भी अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ी। ASI अजय कुमार झा ने आश्रम में पुरानी काउंसलिंग रिपोर्ट्स और पुलिस रिकॉर्ड्स का बारीक मिलान किया, जिससे मृतक की पहचान संभव हो सकी। 24 अगस्त 2026 को वैधानिक औपचारिकताएं पूरी कर क्राइम ब्रांच ने मृतक की अस्थियां उसके भाई को सौंपीं, ताकि परिवार अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपने प्रियजन का अंतिम संस्कार कर सके।
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