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विवेक विहार अग्निकांड: मजिस्ट्रेट जांच में अवैध निर्माण का खुलासा, बिल्डर और नगर निगम की लापरवाही आई सामने

पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार अग्निकांड की मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट में बिना ओसी फ्लैट बेचने, अवैध निर्माण और दमकल विभाग की कमियों को उजागर किया गया है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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8 अगस्त 2026 · 6:04 am3 हज़ार व्यूज़
विवेक विहार अग्निकांड: मजिस्ट्रेट जांच में अवैध निर्माण का खुलासा, बिल्डर और नगर निगम की लापरवाही आई सामने
विवेक विहार अग्निकांड: मजिस्ट्रेट जांच में अवैध निर्माण का खुलासा, बिल्डर और नगर निगम की लापरवाही आई सामने — Hindustan Times

पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में मई महीने में हुए दर्दनाक अग्निकांड की मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। पूर्वोत्तर जिले के जिलाधिकारी अजय कुमार द्वारा दिल्ली के गृह विभाग को सौंपी गई 400 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट के अनुसार, एक बिल्डर कंपनी ने बिना ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) हासिल किए अवैध रूप से फ्लैट बनाए और उन्हें लोगों को बेच दिया। 3 मई को हुई इस भीषण आग में तीन परिवारों के नौ लोगों की मौत हो गई थी और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक वर्धमान बिजनेस वेंचर्स लिमिटेड नामक कंपनी ने स्वीकृत नक्शे के विपरीत जाकर इमारत के ढांचे में भारी फेरबदल किए थे। साल 2013 में स्वीकृत योजना के तहत हर मंजिल पर केवल एक फ्लैट बनाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बिल्डर ने नियम ताक पर रखकर प्रति मंजिल दो-दो फ्लैटों का निर्माण कर दिया। इसके अतिरिक्त स्वीकृत इमारत रेखा से बाहर लोहे की ग्रिल बढ़ाकर उसे उपयोग योग्य जगह में बदल दिया गया।

रिपोर्ट में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अधिकारियों को भी निर्माण के दौरान नियमों के उल्लंघन को पकड़ने में विफल रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। जांच पैनल के समक्ष उपस्थित हुए एमसीडी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि नक्शा पास होने के बाद वहां कोई निरीक्षण नहीं किया गया था। इसके अलावा नगर निगम जांच समिति के सामने इमारत का स्वीकृत लेआउट प्लान तक पेश करने में असमर्थ रहा।

अग्निशमन विभाग और आपातकालीन सेवाओं की कमियों को भी इस दुर्घटना में मौतों का कारण माना गया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि घटना वाले दिन पहली आपातकालीन कॉल उत्तर प्रदेश पहुंच गई थी, जिसे बाद में दिल्ली स्थानांतरित किया गया। इसके बाद मौके पर पहुंचे दिल्ली अग्निशमन सेवा के पहले फायर टेंडर का पानी महज पांच मिनट में समाप्त हो गया, जिसके चलते कर्मचारियों को अतिरिक्त वाहन मंगवाने पड़े।

मजिस्ट्रेट जांच के अनुसार आग की शुरुआत संभवतः दूसरी मंजिल पर लगे एयर कंडीशनर की आउटडोर यूनिट में शॉर्ट सर्किट से हुई थी। हालांकि, सुरक्षा मानकों के अभाव, छत का निकास द्वार बंद होने, संकरे रास्तों और अपर्याप्त वेंटिलेशन के कारण आग व धुएं ने जानलेवा रूप ले लिया। रिपोर्ट में वर्ष 2013 से 2018 के दौरान कंपनी के मालिकों को मुख्य दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।

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