उपराज्यपाल की अनूठी पहल: थाने में पहुंचकर की जनसुनवाई, पुलिस-जनता के रिश्ते और संस्थागत सुधारों पर जोर
- संस्थागत सुधारों और बेहतर कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान

-राजेंद्र स्वामी ,दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: दिल्ली के इतिहास में यह अपने आप में एक अनोखा और अभूतपूर्व अवसर रहा है, जब किसी उपराज्यपाल ने सीधे थाने में पहुंचकर 'थाना दिवस' के मौके पर जनसुनवाई की हो। दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिले के मौर्य एन्क्लेव थाने में आयोजित इस कार्यक्रम में माननीय उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू ने शिरकत कर जिस प्रकार आम नागरिकों की समस्याएं सुनीं, वह जनता के बीच पुलिस के प्रति भरोसे को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बेहद सराहनीय और ऐतिहासिक पहल है।
इस विशेष जनसुनवाई के दौरान स्थानीय नागरिकों ने उपराज्यपाल के समक्ष पार्किंग, भीषण ट्रैफिक जाम, पारिवारिक विवाद और विभिन्न नागरिक एजेंसियों से जुड़े तमाम मुद्दे उठाए। उपराज्यपाल ने न केवल इन समस्याओं को ध्यान से सुना, बल्कि संबंधित अधिकारियों को त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश भी दिए। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की जमीनी पहल से जनता और पुलिस के बीच की दूरियां कम होती हैं और सिस्टम के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ता है।

संस्थागत सुधारों और बेहतर कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान उपराज्यपाल ने मौर्य एन्क्लेव पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली का बारीकी से निरीक्षण किया और वहां तैनात पुलिसकर्मियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित न रहकर, दिल्ली पुलिस के भीतर संस्थागत सुधारों (Institutional Reforms) पर भी गंभीर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
पुलिसिंग को पूरी तरह से जन-केंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए आंतरिक व्यवस्थाओं में सुधार, पुलिसकर्मियों के काम करने के तौर-तरीकों में आधुनिकता और जनता के साथ संवाद के स्तर को और बेहतर करने की जरूरत है। उत्तर-पश्चिम जिले की पुलिस उपायुक्त (DCP) आकांक्षा यादव (IPS) की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया है कि पुलिस थानों की कार्यसंस्कृति में सुधार लाकर ही एक सुरक्षित और पारदर्शी समाज का निर्माण किया जा सकता है।

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