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दिल्ली में यमुना किनारे 31 मार्च 2027 तक बनेगी बाढ़ सुरक्षा दीवार, आईएंडएफसी विभाग ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट

वर्ष 2023 की बाढ़ के दौरान हुए जलभराव को देखते हुए दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने एनजीटी के समक्ष सुरक्षा दीवार और बैराज प्रबंधन की रिपोर्ट पेश की है।

Delhi Darpan Desk
Delhi Darpan Deskसमाचार डेस्क
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3 अगस्त 2026 · 9:31 am1.1 हज़ार व्यूज़अपडेटेड 9:31 am
दिल्ली में यमुना किनारे 31 मार्च 2027 तक बनेगी बाढ़ सुरक्षा दीवार, आईएंडएफसी विभाग ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट
दिल्ली में यमुना किनारे 31 मार्च 2027 तक बनेगी बाढ़ सुरक्षा दीवार, आईएंडएफसी विभाग ने एनजीटी को सौंपी रिपोर्टHindustan Times

दिल्ली दर्पण ब्यूरो रिपोर्ट :- राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के बाढ़ प्रभावित इलाकों को सुरक्षित करने के लिए मैगजीन ड्रेन से पुराने रेलवे पुल तक बाढ़ सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जाएगा। दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण (आईएंडएफसी) विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस परियोजना को 31 मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2023 की बाढ़ के दौरान इस क्षेत्र में जलस्तर बढ़कर 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जिससे मौजूदा तटबंधों के ऊपर से पानी बहने लगा था और निचले इलाकों में भारी जलभराव हुआ था। विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजना की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और वर्तमान में डिजाइन का काम जारी है। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन जैसे वैधानिक निकायों की मंजूरी ली जानी है।

रिपोर्ट में आईटीओ बैराज के नियंत्रण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके अनुसार आईटीओ बैराज दिल्ली सरकार को सौंपे जाने की संभावना नहीं है। हरियाणा सिंचाई विभाग ने दिल्ली को सूचित किया है कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी के प्रवाह के मापन के लिए इस बैराज का नियंत्रण हरियाणा के पास ही रहना आवश्यक है।

वर्ष 2023 की बाढ़ का आकलन करने वाली संयुक्त बाढ़ प्रबंधन समिति ने सिफारिश की थी कि बाढ़ के समय आईटीओ बैराज के सभी द्वारों को खुला रखा जाना चाहिए। समिति ने वजीराबाद और ओखला बैराजों के साथ समन्वय बनाकर काम करने तथा बैराज के उपकरणों का नियमित रखरखाव करने का सुझाव भी दिया था।

विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में बाढ़ के पानी को मोड़ने के लिए छोटे जलाशय बनाने का प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं पाया गया है। जमीन की कमी, नदी में गाद की अत्यधिक मात्रा और भारी वित्तीय लागत के कारण दिल्ली में जलाशय बनाना संभव नहीं है। इसके बजाय रेणुका, किशाऊ और हथनीकुंड जैसे ऊपरी क्षेत्रों में बांधों के निर्माण के प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है।

यमुना के डूब क्षेत्रों में अतिक्रमण और नदी की जल-वहन क्षमता में कमी को भी बाढ़ के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा हथनीकुंड बैराज से दिल्ली सीमा तक 202 किलोमीटर के क्षेत्र में किए गए अध्ययन में पाया गया कि नदी की जल-वहन क्षमता विभिन्न हिस्सों में 1,000 क्यूमेक्स से लेकर 30,000 क्यूमेक्स तक भिन्न है।

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