यमन में फिर भड़का गृहयुद्ध का खतरा, हूती विद्रोहियों की बढ़त से लाल सागर के तेल व्यापार मार्ग पर गहराया संकट
मोखा बंदरगाह की ओर बढ़ते हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते टकराव से 2022 का युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

यमन एक बार फिर व्यापक गृहयुद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के बीच ताजा झड़पों ने साल 2022 से लागू युद्धविराम को खतरे में डाल दिया है। इस नए तनाव से लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार हूती लड़ाके लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक मोखा बंदरगाह में दाखिल हो चुके हैं। यह बंदरगाह अब तक यमन सरकार के नियंत्रण में था और देश में खाद्य सामग्री तथा मानवीय सहायता पहुंचाने का प्रमुख जरिया रहा है। मोखा पर नियंत्रण होने से हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के और भी करीब पहुंच जाएंगे।
यह पूरा इलाका वैश्विक जहाजरानी के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है, जहां से हर साल करीब एक ट्रिलियन डॉलर के माल का परिवहन होता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर बढ़ते खतरे के बाद सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए इस वैकल्पिक मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। हूती विद्रोही अब सऊदी अरब की इस तेल आपूर्ति को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं।
युद्धविराम टूटने की शुरुआत कुछ हफ्ते पहले हुई, जब सऊदी अरब ने विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई हमला किया। हूतियों का कहना है कि यह हमला ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे से लौट रहे उनके नेताओं के विमान को रोकने के लिए किया गया था। इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब के कई तेल संयंत्रों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में यमन मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी के मुताबिक, हूती विद्रोही अब सिर्फ पश्चिमी तट के उत्तरी हिस्से तक सीमित नहीं रहे हैं। उन्होंने तटीय क्षेत्र के एक बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिससे उनकी मौजूदगी बाब अल-मंदेब के बेहद नजदीक हो गई है।
इस नए सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी भारी अस्थिरता पैदा कर दी है, जहां कच्चा तेल पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बिक रहा है। चार करोड़ से अधिक आबादी वाला यमन पहले ही भीषण मानवीय संकट से जूझ रहा है, जहां पिछले गृहयुद्ध में डेढ़ लाख लोगों की मौत हुई थी और भारी भुखमरी फैल गई थी।
लेखक




टिप्पणियाँ
0