दिल्ली: ₹100 करोड़ की चैरिटेबल ज़मीन हड़पने का आरोप, वसीयत में जालसाजी के मामले में EOW ने दर्ज की FIR
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गुलाबी बाग स्थित 'नज़र कंवर सुराणा चैरिटेबल ट्रस्ट' की लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की 2,000 वर्ग गज चैरिटेबल ज़मीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और वसीयत में हेरफेर कर निजी संपत्ति में बदलने के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

-राजेंद्र स्वामी, दिल्ली दर्पण टीवी
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गुलाबी बाग स्थित 'नज़र कंवर सुराणा चैरिटेबल ट्रस्ट' की लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की 2,000 वर्ग गज चैरिटेबल ज़मीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और वसीयत में हेरफेर कर निजी संपत्ति में बदलने के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
पुलिस ने ट्रस्ट के संस्थापक के गोद लिए बेटे संजय सुराणा, उनके जैविक पिता डॉ. सूरजमल सुराणा, चंद्रिका सुराणा एवं अन्य के खिलाफ आईपीसी (IPC) की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (दस्तावेजों की जालसाजी) और 120-B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
यह कार्रवाई संस्थापक स्वर्गीय डूंगरमल सुराणा की पुत्री और ट्रस्टी श्रीमती प्रेम कोठारी की शिकायत और ईओडब्ल्यू के समक्ष प्रस्तुत विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
मूल वसीयत और ज़मीन: स्वर्गीय डूंगरमल सुराणा ने वर्ष 1976 में जनसेवा और स्वास्थ्य सेवाओं के उद्देश्य से ट्रस्ट की स्थापना की थी। उन्होंने अपनी मई 2000 की रजिस्टर्ड वसीयत (Registered Will) के माध्यम से गुलाबी बाग (खसरा नंबर 219-220) की अपनी 10,000 वर्ग गज ज़मीन में से लगभग 7,500 वर्ग गज ज़मीन अस्पताल और धर्मार्थ कार्यों के लिए समर्पित की थी।
गोद लिया पुत्र और ट्रस्ट पर नियंत्रण: संस्थापक का कोई जैविक पुत्र नहीं था, इसलिए उन्होंने संजय सुराणा को गोद लिया था। आरोप है कि वर्ष 2000 में डूंगरमल सुराणा के निधन के बाद संजय सुराणा और उनके जैविक पिता डॉ. सूरजमल सुराणा ने खुद को मैनेजिंग ट्रस्टी/ट्रस्टी बनाकर ट्रस्ट के प्रशासन और वित्तीय मामलों पर पूरा नियंत्रण कर लिया।
ऐसे हुआ मामले का पर्दाफाश
- वित्तीय अनियमितता का संदेह: प्रेम कोठारी के अनुसार, नवंबर 2025 में संजय सुराणा के बेटे की बेहद खर्चीली शादी, विदेश यात्राओं और ट्रस्ट के एक किराएदार द्वारा उपहार में दी गई लग्जरी मर्सिडीज कार के बाद वित्तीय लेन-देन पर संदेह गहराया।
- तीस हजारी कोर्ट का रुख और 10 साल का फॉरेंसिक ऑडिट: जब ट्रस्ट का हिसाब मांगने पर प्रेम कोठारी को ही ट्रस्ट से बाहर करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने तीस हजारी कोर्ट का रुख किया। अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए प्रेम कोठारी को हटाने पर रोक लगाई, नए ट्रस्टी की नियुक्ति रोकी और पिछले 10 वर्षों के खातों का Fornsic Audit कराने का निर्देश दिया।
- वसीयत और म्यूटेशन रिकॉर्ड में जालसाजी: ऑडिट प्रक्रिया के दौरान ज़मीन की पड़ताल में पता चला कि मौके पर 7,500 वर्ग गज के बजाय केवल 5,500 वर्ग गज ज़मीन ही उपलब्ध थी। गहराई से जांच करने पर आरोप सामने आया कि दाखिल-खारिज (Mutation) रिकॉर्ड में लगाई गई वसीयत की प्रति के पेज नंबर 2 में शब्दों को बदलकर '7 Bighas' (लगभग 7,500 वर्ग गज) को '5,500 sq. yards' कर दिया गया था।
- निजी मालिकाना हक और कमर्शियल प्रोजेक्ट: गायब की गई लगभग 2,000 वर्ग गज चैरिटेबल ज़मीन और कॉमन रोड की ज़मीन को मिलाकर संजय सुराणा द्वारा लगभग 4,006 वर्ग गज ज़मीन पर निजी मालिकाना हक जताया गया। इतना ही नहीं, इस ज़मीन पर हाई-राइज कमर्शियल प्रोजेक्ट के लिए एक प्राइवेट बिल्डर (M/s Ambition Homes Pvt. Ltd.) के साथ जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) भी कर लिया गया।
EOW करेगी वैज्ञानिक जांच
शिकायतकर्ता ने राजस्व विभाग से ओरिजिनल म्यूटेशन फाइल को जब्त करने और उसकी तुलना रजिस्टर्ड वसीयत से कराने के लिए Forensic Science Laboratory (FSL) से जांच की मांग की है। फिलहाल दिल्ली पुलिस की EOW पूरे दस्तावेजी साक्ष्यों, म्यूटेशन प्रक्रियाओं और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।
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